अधिकारियों ने कराई नीतीश कुमार की किरकिरी, सुप्रीम कोर्ट ने लगा दिया जुर्माना..

April 2, 2021 by No Comments

नई दिल्ली: वर्ष 2016 जून में एकल पीठ ने नौकरी या पद से हटाने के आदेश को खा’रिज कर दिया था साथ ही जांच रिपोर्ट भी खारिज कर दी गई थी। बता दें कि राज्य सरकार ने एकल पीठ द्वारा दिसंबर 2018 में दिए गए फै’सले को खंडपीठ में चु’नौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार की एक अपील को खारिज कर दिया और अदालत का समय ब’र्बाद करने के लिए राज्य सरकार पर 20 हजार रुपए का जु’र्माना भी लगाया। विभिन्न पक्षों के एक मा’मले पर सहमत होने के बाद पटना उच्च न्यायालय द्वारा मामले का निस्तारण करने से यह अपील जुड़ी हुई थी।

न्यायमूर्ति एसके कौल और न्यायमूर्ति आरएस रेड्डी ने कहा कि राज्य सरकार ने सुप्रीम को’र्ट की खंडपीठ के आदेश के खिलाफ पिछले वर्ष सितंबर में उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की थी। उच्च न्यायालय ने इसके बाद सहमति के आधार पर नि’पटारा कर दिया गया. पीठ ने कहा,‘इसके बाद सहमति के आधार पर निपटारा कर दिया गया। इसके बावजूद विशेष अनुमति याचिका दायर की गई। हम इसे अदालती प्रक्रिया का पूरी तरह दुरुपयोग मानते हैं। और यह कोर्ट की समय की बर्बादी है।

पीठ ने 22 मार्च के अपने आदेश में कहा,‘इस प्रकार हम एसएलपी पर 20 हजार रुपये का जु’र्माना करते हैं, जिसे चार हफ्ते के अंदर उच्चतम न्यायालय समूह सी (गैर लिपिकीय) कर्मचारी कल्याण संगठन के पास जमा कराया जाए।’ तो वहीं, राज्य सरकार इस मामलें में जिम्मेदार अधिकारियों से जुर्माना वसूले जो इस दु:साहस के लिए जिम्मेदार हैं। वर्ष 2016 जून में एकल पीठ ने नौकरी या पद से हटाने के आ’देश को खारिज कर दिया था साथ ही जांच रिपोर्ट भी खारिज कर दी गई थी। बता दें कि राज्य सरकार ने एकल पीठ द्वारा दिसंबर 2018 में दिए गए फैसले को खंडपीठ में चु’नौती दी थी।

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