तबलीग़ जमात मामले की सुनवाई के दौरान उठा किसान रैली का मुद्दा, SC ने केंद्र सरकार से पूछा,”आपने आँखें क्यूँ मूँद..”

January 28, 2021 by No Comments

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आज एक मामले की सुनवाई करते हुए 26 जनवरी को किसान रैली के दौरान हुई अप्रत्याशित घटना का मुद्दा उठाया. प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे ने नाराज़गी भरे लहजे में केंद्र सरकार से पूछा,”सरकार इस मुद्दे पर आंखें मूंदे हुए क्यों है, कुछ कर क्यों नहीं रही है?”आपको बता दें कि गणतंत्र दिवस पर किसानों ने अपनी एक रैली निकाली थी जिसके दौरान हिं’सा हुई थी. किसान नेताओं ने इस हिं’सा के लिए आवंछित तत्वों को ज़िम्मेदार ठहराया.

सुप्रीम कोर्ट में तबलीग़ जमात मरकज़ से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार से सवाल किए. जमीअत उलेमा ए हिन्द और पीस पार्टी समेत अन्य लोगों ने मीडिया रिपोर्ट्स के ख़िलाफ़ एक याचिका दायर की है जिसमें कहा गया है कि मीडिया ने तबलीग़ जमात के मामले को ग़लत तरह से प्रकाशित किया और कई रिपोर्ट्स में इस तरह से भी दिखाया गया मानो धर्म विशेष के लोग ही कोरोना फैलाने के लिए ज़िम्मेदार हैं.

इस पर अदालत ने केंद्र सरकार को 26 जनवरी के रोज़ हुई घटना पर एक तरह से फटकारते हुए कहा,”कुछ समाचारों पर नियंत्रण उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि कुछ निवारक उपाय अपनाना और कानून और व्यवस्था की स्थिति की जांच करना. मैं नहीं जानता कि आप इसके लिए आंखें बंद किए क्यों हैं. सर्वोच्च अदालत ने कहा,”फ़ेक न्यूज़ की वजह से हिं’सा हो. किसी की जान जाए, यह नहीं होना चाहिए. ऐसी स्थिति नहीं पैदा होनी चाहिए किसी ख़बर की वजह से.’

याचिकाकर्ता ने कहा कि सरकार के पास फ़ेक न्यूज़ और अफ़वाह फैलाने वाले कार्यक्रमों पर रोक लगाने की शक्ति है. केंद्र सरकार ने इस पर कहा,”मीडिया को जमात के मुद्दे पर रिपोर्टिंग करने से नहीं रोक सकते. यह प्रेस की स्वतंत्रता का मामला है. मरकज के बारे में अधिकांश रिपोर्टें गलत नहीं थीं.” सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केबल टीवी, डीटीएच और ओटीटी पर तकनीकी पहलू क्या हैं और कैसे नियमित किया जाता है, इस पर सरकार पूरी जानकारी देगी. उन्होंने अदालत से इसके लिए समय माँगा जिसके बाद अदालत ने तीन हफ़्ते का समय दिया है.

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