सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाई के बीच कांग्रेस-एनसीपी-शिवसेना ने सरकार बनाने का दावा पेश किया, भाजपा ख़ेमे में..

मुंबई: महाराष्ट्र में सियासी संकट पर आज सुप्रीम कोर्ट अपना फ़ैसला सुना सकती है. सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस-एनसीपी-शिवसेना ने अपील दायर की है जिसमें कहा गया है कि महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व में गठित हुई सरकार को अदालत तुरंत ही बहुमत सिद्ध करने के लिए कहे. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कल सुनवाई में सरकार के वकीलों से कहा था कि वो उस समर्थन पत्र को पेश करें जो राज्यपाल को सौंपा गया था. आज जब इसकी सुनवाई हुई तो सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि उनके पास में ओरिजिनल डॉक्यूमेंट हैं.

तुषार मेहता ने अदालत से समय माँगा है कि सरकार को कुछ पक्ष रखने के लिए और वक़्त दिया जाए. अपने समर्थन पत्र में अजीत पवार ने लिखा है जिस पर नवम्बर 22 तारीख़ पड़ी हुई है. इसमें कहा गया है कि राष्ट्रपति शासन हमेशा के लिए नहीं चल सकता है और एक स्थिर सरकार की ज़रूरत है..इस पत्र में लिखा गया है कि भाजपा ने पहले अजीत पवार से समर्थन माँगा था लेकिन तब एनसीपी के विधायक तैयार नहीं थे इस वजह से उन्होंने इसको मना कर दिया था.

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट में सोलिसिटर जनरल कहते हैं कि अभी की स्थिति ये है कि राज्यपाल ने बहुमत वाले गठबंधन को सरकार बनाने के लिए invite किया..देवेन्द्र फडनवीस ने दावा पेश किया जिसमें अजीत पवार का समर्थन पत्र था और 11 अन्य विधायकों का समर्थन पत्र था. इसके बाद राज्यपाल ने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि प्रदेश में राष्ट्रपति शासन हटाया जाए..राज्यपाल ने अपने विवेक का सहारा लेते हुए सबसे बड़ी पार्टी को invite किया..देवेन्द्र फडनवीस के पास 170 विधायकों का समर्थन है.

ख़बर है कि शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी के नेताओं ने आज राजभवन पहुँच कर अपने विधायकों का समर्थन पत्र राजभवन को सौंपा. कांग्रेस-एनसीपी-शिवसेना ने सरकार बनाने के लिए अपना दावा पेश किया है. इस पत्र में दावा किया गया है कि मौजूदा सरकार के पास बहुमत नहीं हैं. वहीँ बहस के दौरान एनसीपी-कांग्रेस-शिवसेना के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि राष्ट्रपति शासन हटाने की ऐसी कौन सी इमरजेंसी थी कि सुबह पाँच बजकर 17 मिनट पर राष्ट्रपति शासन हटाया जाए.

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