अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया फ़ैसला,’अदालत को बैलंस..’

नई दिल्ली: अयोध्या विवाद से पहले देश के वरिष्ठ नेताओं ने जनता से शांति और अमन बनाये रखने की अपील की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता से अपील की कि फ़ैसला जो भी आये लेकिन सभी को देश की शांति, एकता और सद्भावना की महान परम्परा को और बल देना है. उन्होंने कहा,”अयोध्या पर कल सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आ रहा है। पिछले कुछ महीनों से सुप्रीम कोर्ट में निरंतर इस विषय पर सुनवाई हो रही थी, पूरा देश उत्सुकता से देख रहा था। इस दौरान समाज के सभी वर्गों की तरफ से सद्भावना का वातावरण बनाए रखने के लिए किए गए प्रयास बहुत सराहनीय हैं।”

उन्होंने कहा,”देश की न्यायपालिका के मान-सम्मान को सर्वोपरि रखते हुए समाज के सभी पक्षों ने, सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों ने, सभी पक्षकारों ने बीते दिनों सौहार्दपूर्ण और सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए जो प्रयास किए, वे स्वागत योग्य हैं। कोर्ट के निर्णय के बाद भी हम सबको मिलकर सौहार्द बनाए रखना है।” मोदी ने आगे कहा,”अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला आएगा, वो किसी की हार-जीत नहीं होगा। देशवासियों से मेरी अपील है कि हम सब की यह प्राथमिकता रहे कि ये फैसला भारत की शांति, एकता और सद्भावना की महान परंपरा को और बल दे।”

ओड़िसा, उत्तर प्रदेश, केरल समेत देश के अलग-अलग राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने जनता से अपील की है कि अदालत के फ़ैसले का सम्मान करें. ओड़िसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायाक ने कहा कि हमारे सेक्युलर तानेबाने का हॉलमार्क है भाईचारा. अदालत ने कार्यवाई शुरू होने के बाद चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया रंजन गोगोई ने शिया वक्फ बोर्ड की स्पेशल लीव पेतितिओं को रद्द कर दिया. इस पेतितिओं में १९४६ के फैजाबाद कोर्ट के आदेश को चैलेन्ज किया गया था. गोगोई ने कहा कि बाबरी मस्जिद मीर बाक़ी ने बनवाई थी..अदालत को इसके अन्य पहलुओं पर जाने की ज़रूरत नहीं है.

चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया रंजन गोगोई ने जजमेंट को पढ़ते हुए कहा कि अदालत को हर फेथ को एक्सेप्ट करना चाहिए, अदालत को बैलंस बनाना चाहिए. गोगोई ने कहा कि ASI की रिपोर्ट के मुताबिक़ नीचे मंदिर था. अदालत ने ये भी कहा कि राम जन्म भूमि कोई क़ानूनी व्यक्ति नहीं है. उन्होंने कहा कि इसमें किसी को डाउट नहीं है कि भगवान् राम अयोध्या में पैदा हुए थे. हिन्दू भावना कहती हैं कि गुम्बद के नीचे ही पैदा हुए थे लेकिन भावना लोगों का व्यक्तिगत मामला है. अदालत ने कहा कि हिन्दू इसे राम जन्मभूमि मानते हैं, मुस्लिम इसे बाबरी मस्जिद कहते हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ आस्था के हिसाब से फ़ैसले नहीं किए जाते. इतिहासिक तथ्यों के हिसाब से इस तरह का इशारा है कि हिन्दू लोगों का ये यक़ीन है कि अयोध्या भगवान् राम का जन्मस्थान है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मस्जिद को मुस्लिम समुदाय ने छोड़ा नहीं था..हालाँकि हिन्दू राम चबूतरा पर पूजा करते थे लेकिन उनका दावा गर्भ गृह पर भी था.अदालत ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड के लिए शांतिपूर्ण कब्जा दिखाना असंभव है. सुन्नी वक्फ बोर्ड ने जमीन पर मालिकाना हक मांगा है. अदालत ने कहा कि मुस्लिमों का बाहरी अहाते पर अधिकार नहीं रहा.

सुन्नी वक्फ बोर्ड ये सबूत नहीं दे पाया कि यहां उसका एक्सक्लूसिव अधिकार था. अदालत ने दोनों पक्षों की भावना को समझते हुए विवादित ज़मीन हिन्दू पक्ष को दी है लेकिन मुस्लिम पक्ष को भी इसके एवज में जगह दी गई है. मुस्लिम पक्ष इस जगह में मस्जिद की स्थापना कर सकेगा. मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में किसी प्रोमिनेंट जगह पर पाँच एकड़ ज़मीन दी जाएगी.

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