सुप्रीम कोर्ट में भाजपा को बड़ा झ’टका, को’र्ट ने कहा “विधायकों को बं’धक बनाकर…”

भारत राजनीति

मध्यप्रदेश में विधानसभा की गह’माग’हमी अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच चुकी है और आज इस बात पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है कि आ’ख़िर बहुम’त अभी सा’बित करना है या नहीं। कमलनाथ सर’कार के बहुम’त परीक्ष’ण नहीं कराने के खि’लाफ पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और 9 भाजपा विधायकों ने सु’प्रीम को’र्ट का दरवा’ज़ा ख’टख’टाया है जबकि कांग्रेस के विधायकों ने भी एक या’चिका दा’यर की है जिसमें बेंगलुरु में रुके 22 बा’ग़ी विधायकों को वा’पस लाने की माँ’ग की गयी है। इस मा’मले पर आज सुप्रीम कोर्ट में बह’स चल रही है जिसमें जस्टिस डी वाय चंद्रचूड़ और जस्टिस हेमंत गुप्ता की बेंच में कांग्रेस के वकील दुष्यंत दवे, भाजपा के वकील मुकुल रोहतगी, राज्यपाल के वकील तुषार मेहता, स्पीकर के वकील अभिषेक मनु सिंघवी और बागी विधायकों के वकील मनिंदर सिंह ने पैरवी की।

यहाँ कांग्रेस के वक़ील दुष्यंत दवे ने ये कहते हुए भाजपा पर आ’रोप लगाया कि बा’ग़ी विधायकों ने भाजपा की सा’ज़िश के कार’ण ही इस्ती’फ़ा दिया है। दवे ने ये भी कहा कि बहुमत परी’क्षण के लिए जिस तरह का ज़ो’र डाला जा रहा है वो भी सही नहीं है इस तरह रा’तोंरा’त मुख्यमंत्री और स्पीकर को आ’देश देना राज्यपाल का काम नहीं हैं, इस मामले में स्पीकर सबसे ऊपर हैं। साथ ही दवे ने कांग्रेस की ओर से ये माँ’ग की कि विधायकों के इस्ती’फ़े से ख़ा’ली हुई सीट पर जब तक उपचुनाव नहीं हो जाते तब तक फ़्लोर टे’स्ट न करवाया जाए। उन्होंने ये कहा कि “अभी कोई आसमान नहीं गि’र पड़ा है कि कमलनाथ सरकार को तुरंत ह’टाकर शिवराज सिंह को ग’द्दी पर बैठा दिया जाए।”


Kamalnath

वहीं भाजपा के वक़ील मुकुल रोहतगी ने इस बात का विरो’ध करते हुए कांग्रेस पर इल्ज़ा’म लगाते हुए कहा- “हम अभी कोर्ट से कोई अंतरि’म आदेश चाहते हैं। कांग्रेस 1975 में सत्ता के लिए देश पर इम’रजें’सी थो’पने वाली पार्टी है। किसी भी तरह स’त्ता में बने रहना चाहती है। स’त्ता के लिए अजीब दली’लें दी जा रही हैं। जिसके पास बहुम’त नहीं है, वह एक दिन स’त्ता में नहीं रह सकता। यहां पहले खा’ली सीटों पर चुनाव की दली’ल देकर 6 महीने का प्रबं’ध करने की यो’जना है। चुनाव करवाना चुनाव आयोग का काम है। यहां इस पर वि’चार नहीं हो रहा, फ्लोर टे’स्ट पर हो रहा है”

वहीं कांग्रेस की ओर से ये स’वाल भी उठाया गया कि क्या वाक़ई विधायकों ने इस्ती’फ़े अपनी मर्ज़ी से दिए हैं या इसमें भाजपा का हाथ है क्योंकि इस्तीफ़े सौंपने का काम भी स्वयं विधायकों ने नहीं किया और उन्हें बेंगलुरु में बं’धक बनाकर रखा गया है। इस बात का विरो’ध भाजपा की ओर से किया गया तो कांग्रेस की ओर से दली’ल दी गयी कि “विधायकों को किसी से मिलने नहीं दिया जा रहा है और उन्हें चार्टर्ड विमानों से बा’हर ले जाकर भाजपा के द्वारा बुक किए रिजॉर्ट में रखा है। उनसे ज़बरन इस्तीफ़े लिखवाए गए है ये बड़ी सा’ज़िश है इसकी जाँ’च होनी चाहिए।”


Kamalnath- Digvijay Singh

जहाँ इस माम’ले पर भाजपा की ओर से दली’ल दी गयी कि वो बा’ग़ी विधायकों को ज’ज के चें’बर में पेश कर सकते है या उन्हें विकल्प के तौर पर कर्नाटक हाईकोर्ट के रजि’स्ट्रार जनर’ल को गुरुवार को विधायकों के पास भेजकर वीडियो रिकॉ’र्डिंग करा सकते हैं। वहीं बाग़ी विधायकों के वक़ील मनिंदर सिंह ने कहा कि सभी ने अपनी मर्ज़ी से इस्ती’फ़ा दिया है, जिसका कार’ण वैचारिक मतभे’द है और उन्हें ये अधि’कार है। लेकिन स्पीकर इस माम’ले में सेले’क्टिव हो रहे हैं और इस्ती’फ़े नहीं स्वी’कार रहे इसलिए हम भी फ़्लोर टे’स्ट करवाने के प’क्ष में हैं। इस बात के जवाब में बेंच ने जो कहा वो भाजपा के लिए मुश्कि’लें ला सकता है।

बेंच ने कहा- “हम कैसे त’य करें कि विधा’यकों के हल’फनामे मर्जी से दिए गए या नहीं? यह संवैधा’निक को’र्ट है। हम संविधान के दा’यरे में क’र्तव्यों का नि’र्वहन करेंगे। टीवी पर कुछ देखकर त’य नहीं कर सकते। 16 बागी विधायक फ्लोर टे’स्ट में शामिल हों या नहीं, लेकिन उन्हें बं’धक नहीं रखा जा सकता। अब साफ हो चुका है कि वे कोई एक रास्ता चुनेंगे। उन्होंने जो किया उसके लिए स्वतंत्र प्रक्रिया होनी चाहिए। इसके साथ ही अदालत ने वकीलों से स’लाह मां’गी कि कैसे विधानसभा में बे’रोकटो’क आने-जाने और किसी एक का च’यन सुनिश्चित हो”

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