सुप्रीम कोर्ट में मु’स्लिम महिलाओं के इस बड़े अधि’कार पर हुई ये बात, मु’स्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने…

मु’स्लिम महिलाओं को म’स्जिदों में नमा’ज पढ़ने की इजाजत देने के लिए दायर या’चिका पर बुधवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। या’चिका में कहा गया था कि किसी भी प्रकार का भे’दभाव नहीं होना चाहिए और सभी मु’स्लिम महिलाओं को सभी म’स्जिदों में न’माज़ अदा करने की अनुमति दी जानी चाहिए। इस या’चिका पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबड़े और जस्टिस एसए न’जीर की बेंच ने सुनवाई की।

सुनवाई के दौ’रान पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से जानना चाहा कि क्या विदेशों में मुस्लिम महिलाओं को मस्जिद में प्रवेश की इजाजत है?
इस पर वकील ने कहा कि मु’स्लिम महिलाओं को पवित्र मक्का की म’स्जिद और कनाडा में भी म’स्जिद में प्रवेश की अनुमति है। या’स्मीन जु’बेर अह’मद पीर जादा द्वारा दा’खिल की गई या’चिका पर ऑल इंडिया मु’स्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने २९ जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि मु’स्लिम महिलाओं को पुरुषों की तरह ही नमा’ज़ के लिए म’स्जिदों में प्रवेश की अनुमति होती है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

मुस्लिम बोर्ड के सचिव मोहम्मद फज’लुर्रहीम ने वकील एम आर शम’शाद के द्वारा अपने हल’फनामे में कहा कि मु’स्लिम महिला नमा’ज के लिए म’स्जिद में प्रवेश के लिए स्वतंत्र है और उसके पास म’स्जिद में नमा’ज के लिए उपलब्ध सारी सुविधाओं का लाभ उठाने का अधिकार है। साथ ही हल’फनामे में यह भी कहा कि इस्ला’म में मु’स्लिम महिलाओं के लिए जमा’त के साथ नमा’ज पढ़ना अनिवार्य नहीं है और ना ही जमा’त के साथ जुमे की नमा’ज में शा’मिल होना सही है।

इसमें कहा गया कि मु’स्लिम महिलाओं को अलग स्थान दिया गया है, उनके लिए अलग द्वार हैं और वह नमा’ज़ चाहें घर पर पढ़े या म’स्जिद में पुण्य उतना ही मिलेगा। भारत में महिलाओं को म’स्जिद जाने और वहां नमा’ज़ पढ़ने का अधिकार मिल पाएगा, इसका फैस’ला आने वाला वक़्त करेगा।

प्रतीकात्मक तस्वीर

इस माम’ले में किसी निष्प’क्ष राय तक पहुंचना को’र्ट के लिए भी मु’श्किल है। यदि इस मस’ले को महिला-पुरुष बरा’बरी के विवा’द से बाहर आकर देखें तो एक व्यवहारिक दि’क्कत भी है। इस्ला’म में पर्दे का बड़ा महत्व है, ऐसे में हर छोटी म’स्जिद में महिलाओं के लिए अलग नमा’ज का प्रबं’ध करना भी किसी चु’नौती से कम नहीं है।

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Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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