सूरज डूब जाता है तो जाता कहाँ है? इस्लाम के नज़रिए से जानते हैं ये अहम बात..

इस्लाम

अस्स’लाम ओ अलैकु’म दोस्तों, हम सभी इस बात को जानते हैं कि हर रोज़ सुबह सूरज हमें नज़र आता है लेकिन रात होते होते ये पूरी तरह से ग़ा’यब हो जाता है. इसका क्या कारण है हम इस बात को अक्सर सोचते हैं लेकिन कई बार हम जवाब ढूँढने में नाकाम रहते हैं. हम आज आपको इस्लाम के नज़रिए से इस बात को बताने जा रहे हैं.

पूरे दिन सूरज आसमान में चलता रहता है,फिर उसके बाद यह डूब जाता है,हमारी नज़रों से ओझल हो जाता है,इस बारे में बहुत कम लोग जानते हैं कि दूसराज डूबने के बाद कहाँ जाता है। आज हम आप को यहाँ पर यही बताएँगे कि सूरज डूबने के बाद कहाँ जाता है।कुरान पाक में आया है कि. حتى اِذَا بَلَغَ مَغْرِبَ الشَّمْسِ وَجَدَهَا تَغْرُبُ فِيْ عَيْنٍ حَمِئَةٍ (सूरह कहफ)

ज़ुलक़ुरनैन ने सफ़र शुरू किया यहाँ तक कि सूरज डूबने की जगह पहुंच गए,और उसे एक दलदल के चश्मे में ग़ुरूब होता हुआ पाया।इमाम इबन कसीर इस आयत की तफ़सीर में लिखते हैं।(ज़ुलक़ुरनैन सफ़र करते करते) जब इंतिहाए मग़रिब की सिम्त पहुंच गए तो ये मंज़र देखा कि गोया बहर मुहीत में सूरज ग़ुरूब हो रहा है। जो भी किसी समुंद्र के किनारे खड़ा हो कर सूरज को ग़ुरूब होते हुए देखेगा तो बज़ाहिर यही मंज़र उस के सामने होगा कि गोया सूरज पानी में डूब रहा है।

हालाँकि सूरज चौथे आसमान पर है और इससे अलग कभी नहीं होता।सय्यदना अबूज़र रज़ी अ’ल्लाहु अनहु बयान करते हैं कि अल्ला’ह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया क्या तुझे मालूम है जब सूरज ग़ुरूब होता है तो कहाँ जाता है? मैंने कहा अल्ला’ह और उस के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को इलम है। आपने फ़रमाया सूरज अर्श के नीचे जाकर सजदा करता है,इजाज़त तलब करता है उसे इजाज़त मिल जाती है।

क़रीब है कि वो सजदा करेगा और इस का सजदा क़बूल ना हो।वो तलूअ होने की इजाज़त तलब करेगा और इस को इजाज़त ना मिले उसे हुक्म हो जिधर से आया उसी तरफ़ से तलूअ हो जा।चुनांचे सूरज मग़रिब की तरफ़ से तलूअ होगा ये अ’ल्लाह ताला का इरशाद है सूरज अपने मुस्तक़र की तरफ़ चला जाता है आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया उस का ठिकाना अर्श के नीचे है।

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