सियासी दाँव पेंच में उलझे ज्योतिरादित्य सिंधिया, उपचुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस में..

September 4, 2020 by No Comments

भोपाल: मध्य प्रदेश में सियासत अपने च’रम पर है. कोरोना वायरस के बीच भाजपा और कांग्रेस दोनों उपचुनाव के प्रचार में जुटी हैं. ये उपचुनाव दोनों ही पार्टियों के लिए अ’हम् है. 27 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव में भाजपा में नए नए शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया की साख भी दाँव पर लगी है. सिंधिया ने कांग्रेस से ब’ग़ावत करके भाजपा में एंट्री की थी. अब वो भाजपा और कांग्रेस दोनों के बीच कम्पैरीज़न कर रहे हैं.

राज्यसभा सांसद सिंधिया ने ग्वालियर-चम्बल क्षेत्र में भाजपा के तीन दिवसीय सदस्यता अभियान के अंतिम दिन कहा,”आने वाला उपचुनाव न्याय और सम्मान का है और जो व्यक्ति जनता के बीच नहीं रहता, उसे वोट मांगने का कोई हक नहीं है. आने वाला चुनाव मध्य प्रदेश का भविष्य तय करेगा.” वो आगे कहते हैं कि जनता को तय करना है कि बड़ा-छोटा भाई चाहिए या फिर त्रिमूर्ति चाहिए.

बड़ा भाई-छोटा भाई उन्होंने कमल नाथ और दिग्विजय सिंह को कहा जबकि त्रिमूर्ति उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केन्द्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और ज्योतिरादित्य सिंधिया को कहा. सिंधिया ने कहा,”मुख्यमंत्री चौहान ने गोहद (भिण्ड जिले का विधानसभा क्षेत्र) के लिए तुरंत 110 करोड़ रुपए की योजना स्वीकृत कर दी. वहीं कमलनाथ (अपनी तत्कालीन सरकार के दौरान) धन की कमी का रोना रोते थे.”

सिंधिया कहते हैं कि साल 2018 में जब विधानसभा चुनाव के बाद मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनी तो ऐसा 15 साल बाद हुआ और इसमें ग्वालियर-चम्बल क्षेत्र का बहुत योगदान रहा. उन्होंने कहा कि यहाँ पहली बार 34 में से 26 सीटें कांग्रेस को मिलीं लेकिन 15 महीनों में क्या हुआ..सबने देखा. सिंधिया ने दावा किया कि हमारा कुर्सी या पद से मोह नहीं है, लेकिन न्याय, सम्मान और विकास की बात होनी चाहिए. विश्लेषक मान रहे हैं कि सिंधिया को मालूम है कि ये उपचुनाव आसान नहीं हैं. हालाँकि सत्ता में होने का फ़ायदा भाजपा को मिलेगा लेकिन कांग्रेस भी दमख़म से काम ले रही है.

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