शुरूआती ल’ड़ाई में अज़रबैजान ने हासिल की ब’ड़ी जीत, आर्मीनिया ने ख़ुद माना..

September 28, 2020 by No Comments

अर्मीनिया और अज़रबैजान के बीच चल रही जं’ग के शुरू में ही अज़रबैजान को कामयाबी मिली है. इतवार के रोज़ अर्मीनिया के नेता अरयिक हारुतयुनयुन ने माना कि नागोर्नो-काराबाख़ के क्षेत्र में उनकी से’ना को कई इलाक़ों से पीछे हटना पड़ा है. उन्होंने बताया कि अर्मीनिया को क्ष’ति हुई है. दूसरी ओर अज़रबैजान की से’ना ने दूसरा ओफेंसिव शुरू कर दिया है.

अज़रबैजान को तुर्की और रूस जैसे देशों का समर्थन मिल रहा है वहीं अर्मीनिया पर आरोप लग रहे हैं कि इसने PKK जैसे विवादित संगठनों का सहारा लेना शुरू कर दिया है. रूस और ईरान ने यु’द्धवि’राम की अ’पील की है. ईरान ने कहा है कि दोनों देशों को अपने झग’ड़े बातचीत से सुल’झाने चाहियें. दोनों ही देशों के बीच विवा’द पु’राना है जिसे नागोर्नो-कराबख वि’वाद के नाम से जाना जाता है. इस साल जुलाई में भी दोनों देशों के बीच झ’ड़प हुई जिसको दोनों ही देशों ने अपनी अपनी जी’त बताया.

अन्तराष्ट्रीय तौर पर अज़रबैजान का हिस्सा माने जाने वाले नागोर्नो-काराबाख़ पे अर्मीनिया का क़ब्ज़ा है. अर्मीनिया इस क्षेत्र को अर्तसाख़ गणराज्य का हिस्सा मानता है. हालाँकि अन्तराष्ट्रीय तौर पर ये अज़रबैजान का हिस्सा है. इस क्षेत्र की आबादी डेढ़ लाख के क़रीब है और यहाँ अर्मेनियाई मूल के अधिक लोग हैं. बार-बार अन्तराष्ट्रीय समुदाय ये अपील कर चुका है कि अर्मीनिया इस क्षेत्र को छोड़े लेकिन अर्मीनिया ने ऐसा न तो किया है और न ही वो करना चाहता है.

तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने अज़रबैजान का पक्ष लेते हुए कहा कि 30 साल से OSCE मिन्स्क ग्रुप कोई हल नहीं प्राप्त कर सका. सन 1992 में मिन्स्क ग्रुप को बनाया गया था जिसकी अध्यक्षता फ़्रांस, रूस और यूनाइटेड स्टेट्स के पास थी. इस ग्रुप का काम था कि ये क्षेत्रीय विवा’द का शांतिपूर्ण हल ढूँढें लेकिन अब तक ये फ़ेल रहा है.

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