शिवसेना ने मोदी सरकार को लेकर दिया चौं’काने वाला बयान,’क्या आर्थिक मं’दी पर भी बं’दूक़ ता’नोगे?’

मुंबई: महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर भाजपा और शिवसेना के बीच म’तभेद नज़र आ रहे हैं. शिवसेना ने देश के आर्थिक हालात पर सरकार को घेरने की कोशिश की है. शिवसेना ने सामना में लिखा है कि अनुच्छेद 370 को ह टाना और आर्थिक मं दी दो अलग-अलग विषय हैं. सामना में पार्टी ने लिखा,”अनुच्छेद 370 ह टाकर सरकार ने साहसी कदम आगे बढ़ाया और देश इसे लेकर प्रसन्न है. परंतु कश्मीर और आर्थिक मं’दी दो अलग विषय हैं.”

इसमें आगे लिखा गया है,”कश्मीर में विद्रोही सड़क पर उतरें तो उन्हें बंदूक के जोर पर पीछे ढकेला जा सकता है लेकिन आर्थिक मं’दी पर बंदूक वैसे तानोगे? मं दी के कारण बे’रोजगारी बढ़ेगी और लोग ‘भूख-भूख’ करते सड़क पर आएंगे तब उन्हें भी गो’ली मा’रोगे क्या? आर्थिक मं-दी पर भक्त चाहे कितना भी उल्टा-पुल्टा कहें तब भी सच के मुर्गे ने बांग दे दी है और मौनी बाबा मनमोहन द्वारा सौम्य शब्दों में कहे गए सच से भी ध’माका हो ही गया…”

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इसके आगे लिखा गया है,”देश की आर्थिक नब्ज को हाथ में पकड़कर राजनीतिक व्यवस्था को मनमाने तरीके से हांकना ख़’तरनाक है. उद्योग, व्यापार करनेवालों की गर्दन पर छुरी रखने से राजनैतिक पार्टियों को तात्कालिक लाभ हो सकते हैं लेकिन देश गिरता जा रहा है.’ शिवसेना ने सामना में लिखा, ‘विगत कई वर्षों से अर्थव्यवस्था का संबंध पार्टी फंड, चुनाव जीतने, घोड़ा बाजार आदि तक के लिए ही शेष रह गया है, इससे ‘देश की व्यवस्था’ नष्ट हो रही है.

शिवसेना ने सरकार को सलाह दी है कि आर्थिक मं दी पर राजनीति न करें तथा विशेषज्ञों की मदद से देश को संवारें, ऐसा आह्वान मनमोहन सिंह जैसे बुद्धिजीवी व्यक्ति ने किया है. इनकी सलाह को गंभीरता से लेने में ही राष्ट्र का हित है. इतना ही नही मं दी को लेकर सामना में देश की पहली वित्तमंत्री पर भी निशाना साधा गया है.

सामना में लिखा है, ‘नोटबंदी और जीएसटी जैसे निर्णय देश में आर्थिक मं दी की वजह बन रहे हैं, ऐसा मनमोहन सिंह कह रहे हैं. देश की विकास दर गिर रही है. उत्पादन क्षेत्र में बढ़ोत्तरी घट गई है तथा लाखों लोगों पर नौकरी गंवाने का संकट आ गया है. फिर भी यह हालात सरकार को भयावह नहीं लगते, ऐसी अवस्था हैरान करनेवाली है. ….हमारी पहली महिला वित्त मंत्री को कहीं भी आर्थिक मं-दी नजर नहीं आती तथा देश में सब कुशल-मंगल है, ऐसा उनका कहना है. आर्थिक ‘मं दी’ पर वह कई बार मौन ही बरतती हैं.

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Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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