नई दिल्ली: अरब सागर से उठे चक्रवाती तूफान ताउते के कारण भारी नु’कसान हुआ है। मुंबई हाई के समुद्र में तेल की खुदाई का कार्य करने वाले बार्ज-पी 305 पर काम करने वाले कई मज़दूरों की इस तूफान में मौ’त हो गई। इसी मामलें को लेकर शिवसेना के मुखपत्र सामना में पेट्रोलियम मंत्री पर सवाल खड़े किए हैं।

शिवसेना ने सामना में लिखा, “देश के पेट्रोलियम मंत्री, ओएनजीसी के अध्यक्ष और उनके संचालक मंडल की इस दुर्घ’टना में कुछ जिम्मेदारी है या नहीं ? इतने बड़े तूफान के बारे में पहले ही मैसम विभाग ने चेतावनी दी थी। बार्ज पूरी तरह दुरुस्त नही था और उसपर काम करने वाले कर्मचारी थे”। तूफान से बचने के लिए कोई आ’पातकालीन व्यवस्था नहीं थी।

75 कर्मचारियों की इस तूफान में जा’न चली गईं। शिवसेना ने कहा, वैज्ञानिकों और उपग्रहों ने तूफान की पहले से ही चेतावनी दे दी थी। लेकिन फिर भी ओएनजीसी ने इस चेतावनी को नजरअंदाज किया और मुंबई हाई के समुद्र में तेल की खुदाई का कार्य करने वाले बार्ज पर काम कर रहे 700 मजदूरों को वापस नहीं बुलाया।

इस चक्रवाती तूफान ताउते में बार्ज के डूबने से 75 मज़दूरों की जा’न चली गई। 49 श’व मिले हैं और अभी 24 लोग इस तूफान की वजह से ला’पता हो गए। सामना में आगे लिखा गया कि, ये मज़दूर ओएनजीसी के लिए तेल उत्खनन कर रहे थे। इनकी रक्षा की जिम्मेदारी ओएनजीसी प्रशासन की ही थी। मनुष्य वध की जिम्मेदारी तूफान पर नहीं डाली जा सकती है।

तूफान का पूर्वानुमान होने के बावजूद जो सो रहे थे, वही अप’राधी हैं। शिवसेना ने कहा है कि, पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान कहां हैं? क्या वह जिम्मेदारी लेकर इस्ती’फा देने वाले हैं?

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