केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आज लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 पेश किया. यह विधेयक लोकसभा के दैनिक कामकाज के तहत सूचीबद्ध
किया गया था.इस पर वोटिंग हुई और ये लोकसभा में पारित हो गया. जानकार मानते हैं कि इस बिल का राज्यसभा में पास होना उतना आसान नहीं है जितना सरकार दावा कर रही है. बिल के विरोध में आवाज़ें उठ रही हैं. इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग पार्टी के सांसदों ने संसद परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ प्रदर्शन किया है।

शिवसेना नेता संजय राउत ने सोमवार को ट्वीट करते हुए लिखा है कि अवैध नागरिकों को बाहर करना चाहिए, हिंदुओं को भारत की नागरिकता देनी चाहिए। लेकिन उन्हें कुछ समय के लिए वोटिंग का अधिकार नहीं देना चाहिए। क्या कहते हो अमित शाह? और कश्मीरि पंडितों का क्या हुआ, क्या 370 हटने के बाद वो वापस जम्मू-कश्मीर में पहुंच गए?

शिवसेना ने नागरिकता संशोधन बिल का विरोध किया है। मुखपत्र सामना के जरिए शिवसेना ने कहा है कि है इस बिल के जरिए बीजेपी हिंदू-मुसलमान के बीच अदृश्य बंटवारे की कोशिश कर रही है। कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने ट्वीट कर कहा है कि कांग्रेस पार्टी अपने वर्तमान रूप में नागरिकता संशोधन विधेयक का कड़ा विरोध करती है, क्योंकि यह असंवैधानिक है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले बुधवार को इस विधेयक को मंजूरी दी थी। इस बावत पार्टी ने अपने सांसदों को 3 दिनों के लिए व्हिप जारी कर दिया है। अगर यह बिल कानून बन जाता है तो पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न के कारण वहां से भागकर आए हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म को मानने वाले लोगों को CAB के तहत भारत की नागरिकता दी जाएगी।

कांग्रेस के सीनियर लीडर मनीष तिवारी ने गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान पर हमला बोला है जिसमें उन्होंने धर्म के आधार पर देश के विभाजन के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया था. मनीष तिवारी नेकहा कि तथ्य यह है कि पहली बार अहमदाबाद में 1935 में वीर सावरकर ने द्विराष्ट्र का सिद्धांत दिया था. हिंदू महासभा के अधिवेशन में उन्होंने यह बात कही थी. उनके इस आरोप पर बीजेपी सांसदों ने ऐतराज भी जताया.

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