शिवसेना अपनी माँग पर क़ायम, 9 नवम्बर तक होना है सरकार का गठन वर्ना..

मुंबई: महाराष्ट्र में मौजूदा सियासी संकट शायद किसी को भी ठीक से समझ नहीं आ रहा है. शिवसेना और भाजपा के बीच चुनाव से पहले एक गठबंधन था और कुछ मुद्दों पर समझौता हुआ होगा. चुनाव से पहले भाजपा ने देवेन्द्र फडनवीस को ही अपना मुख्यमंत्री उम्मीदवार बताया तो शिवसेना की ओर से पहली बार ठाकरे परिवार के सदस्य ने चुनाव लड़ा. शिवसेना से ये सवाल भी पुछा गया कि क्या वो आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री के रूप में पेश कर रही है. छोटे नेता भले कुछ कह रहे हों लेकिन बड़े नेताओं ने इस पर कोई बयान न दिया.

महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल 10 नवम्बर तक ही है और इस हिसाब से 9 नवम्बर को सरकार का गठन हो जाना चाहिए था. भाजपा-शिवसेना गठबंधन को बहुमत मिला भी. हालाँकि सीटें कम हुईं और परफॉरमेंस एक तरह से ख़राब ही माना जाएगा पर सीटें फिर भी इतनी आ गईं कि सरकार बन जाए. एनसीपी-कांग्रेस ने पहले ही दिन स्वीकार कर लिया कि उनका गठबंधन विपक्ष में बैठेगा.

एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने बार-बार कहा कि जनता ने उन्हें विपक्ष में बैठने के लिए मैंडेट दिया है. परन्तु शिवसेना ने भाजपा से माँग कर दी कि उसे मुख्यमंत्री पद पर भी बँटवारा चाहिए. शिवसेना ने भाजपा से ढाई-ढाई साल की थ्योरी बताई. शिवसेना कहती है कि ये बात पहले हो चुकी थी लेकिन भाजपा अब इस पर कुछ कहना नहीं चाहती. भाजपा बस ये कहती है कि पार्टी उसकी ज़्यादा सीटें जीती है तो भाजपा नेतृत्व में ही सरकार का गठन होगा.

भाजपा के “चाणक्य” माने जाने वाले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह इस मुद्दे पर कुछ भी बयान देने से बच रहे हैं. भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को पहले लगा कि शिवसेना महज़ दबाव बनाने के लिए इस तरह के बयान दे रही है लेकिन अब भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में सन्नाटा है. कांग्रेस-एनसीपी भी कुछ ख़ास बयान नहीं दे रहे. भाजपा नेताओं की मीटिंग्स चल रही हैं लेकिन ये कहा जाता है मुद्दा किसानों का है, कांग्रेस-एनसीपी के नेता भी कह रहे हैं कि शिवसेना प्रपोज़ल देगी तभी तो बात आगे होगी.

इस पूरे ड्रामे में आज कुछ और भी चीज़ें हुईं. शिवसेना ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वो उसके विधायकों को ख़रीदने की कोशिश कर रही है. उधर उद्धव ठाकरे ने कहा कि बीजेपी उनसे तभी बातचीत करे जब वह हमें मुख्यमंत्री का पद देने के लिए राजी हो जाए। अगर वो ऐसा नहीं कर सकती तो हमसे संपर्क न करे। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले जो तय हुआ था जनता ने उसी के तहत गठबंधन (बीजेपी-शिवसेना) को बहुमत दिया है।

कुल मिलकर महाराष्ट्र की राजनीति अब शिवसेना की तरफ़ देख रही है. शिवसेना ने न तो अब तक आधिकारिक तौर पर भाजपा से गठबंधन तोड़ा है और न ही ऐसा लग रहा है कि वो फ़ैसला लेने में किसी जल्दी में है. कांग्रेस-एनसीपी भी तब तक कुछ नहीं कर सकते जब तक शिवसेना भाजपा से गठबंधन तोड़ कर उससे समर्थन नहीं मांगती. भाजपा बस आस लगाए बैठी है कि शिवसेना उसकी बात मान जाए.

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Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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