भाजपा को झ’टका देकर शिवसेना कर सकती है शरद पवार से मुलाक़ात,’शरद जी कभी..’

October 29, 2019 by No Comments

मुंबई: महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के बाद सरकार बनाने को लेकर शिवसेना और भाजपा में आपसी खींचतान जारी है. ये खींचतान कितनी आपसी है और कितनी नहीं ये तो आने वाला वक़्त बतायेगा लेकिन अभी की स्थिति ये है कि दोनों ही दल चाहते हैं कि उनका मुख्यमंत्री हो. भाजपा इस बात पर कतई राज़ी नहीं दिख रही है और शिवसेना भी इस बार मानने के मूड में नहीं दिख रही है. सत्ता के इस खेल के बीच भाजपा और शिवसेना दोनों ने ही निर्दलीय विधायकों को साधना शुरू कर दिया है.

चुनाव से पहले गठबंधन होने के बाद भी भाजपा-शिवसेना में जिस तरह का विवाद उभर रहा है इससे ज़ाहिर है कि दोनों दलों के बीच गठबंधन सिद्धांत पर नहीं गणित पर ही आधारित था. हालाँकि महाराष्ट्र में सबसे अधिक सीटें भाजपा की आई हैं लेकिन शिवसेना का कहना है कि भाजपा को भी जो सीटें मिली हैं वो इसीलिए मिली हैं क्यूँकि शिवसेना समर्थकों ने इस उम्मीद पर ही वोट किया कि भाजपा भी जीती तो भी आदित्य ठाकरे ही मुख्यमंत्री बनेंगे.

इस बीच शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने भाजपा पर एक बार फिर कटाक्ष किया. जब उनसे ये सवाल किया गया कि महाराष्ट्र में अब तक सरकार क्यूँ नहीं बन पायी है तो उन्होंने कहा कि यहाँ कोई दुष्यंत चौटाला नहीं है जिसके पिता जेल में हों. शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा,”यहाँ कोई दुष्यंत नहीं हैं, जिनके पिता जेल में हों. यहां हम हैं, जो ‘धर्म और सत्य’ की राजनीति करते हैं. शरद जी जिन्होंने बीजेपी और कांग्रेस के खिलाफ माहौल बनाया है जो कभी बीजेपी के साथ नहीं जाएंगे.”

राउत के बयान से ज़ाहिर है कि वो शरद पवार की एनसीपी से समर्थन की उम्मीद कर रहे हैं. एनसीपी अध्यक्ष पवार ने भी चुनाव नतीजों के बाद बयान में कहा था कि अगर उनके पास कोई विकल्प आता है तो वो विचार करेंगे. उन्होंने इसके साथ ही कहा कि हमारे पास और विकल्प भी खुले हैं. उन्होंने कहा,”उद्धव ठाकरे जी ने कहा है कि हमारे पास अन्य विकल्प भी हैं लेकिन हम उस विकल्प को स्वीकार करने का पाप नहीं करना चाहते हैं. शिवसेना ने हमेशा सच्चाई की राजनीति की है, हम सत्ता के भूखे नहीं हैं.”

शिवसेना के सूत्रों से ख़बर है कि पार्टी एनसीपी से बात कर सकती है. इस बारे में शरद पवार से जल्द ही मुलाक़ात हो सकती है. शिवसेना ऐसी उम्मीद कर रही है कि अगर एनसीपी ने उसे समर्थन दिया तो कांग्रेस भी भाजपा की सरकार को रोकने के लिए उसे समर्थन दे देगी. अभी इस मामले में लेकिन कयास ज़्यादा लगाए जा रहे हैं और सही में कहना मुश्किल है कि क्या होने वाला है और क्या नहीं.

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