शरद पवार की ‘चाणक्य नीति’ ने भाजपा को उलझाया, अब अजीत पवार से फ़ोन…

मुंबई: इस समय ऐसा लग रहा है कि महाराष्ट्र सियासी संकट में एनसीपी ने बढ़त बना ली है और भाजपा अब महज़ इस भरोसे पर ही है कि अजीत पवार किसी तरह एनसीपी के विधायकों को तोड़ लें. परन्तु जो ख़बरें आ रही हैं वो भाजपा के लिए चिंता बढ़ाने वाली हैं. असल में इसमें कई थ्योरी चल रही हैं कि अजीत पवार ने भाजपा का समर्थन क्यूँ किया, उन्होंने इतना बड़ा रिस्क क्यूँ लिया..या क्या उन्होंने एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार के कहने पर सारा काम किया और इस खेल के असली खिलाड़ी शरद पवार ही हैं.

इस थ्योरी को बताने वाले मानते हैं कि शरद पवार ने अजीत पवार से कहा कि वो भाजपा के साथ जाकर मिल जाएँ और जब वो शपथ ले लेंगे तब एनसीपी पूरी तरह से इस मामले पर ख़ुद को अलग-थलग बताएगी. वहीँ अजीत पवार भाजपा को ये भरोसा जताते रहेंगे कि वो ही इस खेल के खिलाड़ी हैं और सरकार को विश्वास मत के समय बचा लेंगे. इस पूरे खेल में अजीत पवार अपने ऊपर लगे बहुत से आरोपों को साफ़ भी करवा लेंगे. इस तरह की ख़बरें आ भी गई हैं कि उन्हें भ्रष्टाचार के कुछ आरोपों में क्लीन चिट मिल गई है.

Sharad Pavar- Ajit Pavar

शिवसेना और कांग्रेस इस पूरे खेल के बारे में कुछ नहीं जानते थे और भाजपा को तो लगा कि जाता हुआ राज्य वापिस मिल रहा है. परन्तु शरद पवार ने अपनी शतरंज जैसी चाल से सबको मात दे दी ऐसा लग रहा है. एक समय जहाँ ये लग रहा था कि एनसीपी टूट जाएगी और शरद पवार का राजनीतिक करीयर ख़त्म हो जाएगा वहीं ये सब दो-तीन घन्टे में ही शरद पवार के पक्ष में जाता दिखा. पवार के इस पूरे प्रकरण से बहुत सारे फ़ायदे हुए हैं.

पहला फ़ायदा तो ये कि उन्होंने अपने आपको महाराष्ट्र की राजनीति का चाणक्य भी साबित कर दिया है और भाजपा के चाणक्य को शिकस्त दे दी है. भाजपा के बड़े नेता भी समझ नहीं पाए कि ये आख़िर हुआ क्या. दूसरा फ़ायदा ये है कि एनसीपी एक बार फिर मुख्य पार्टी बन कर उभर आयी है. तीसरा फ़ायदा ये कि उन्होंने एनसीपी पर पूरी तरह से कण्ट्रोल कर लिया है और अब वो अपनी बेटी सुप्रिया सुले को आगे बढ़ा कर पार्टी की कमान दे सकते हैं. अजीत पवार यहाँ पर अपने चाचा की समझ को समझ नहीं पाए और ग़लती कर बैठे.

ये सब हालाँकि कयास हैं और कई थ्योरी बाज़ार में चल रही हैं. परन्तु हर एक थ्योरी में शरद पवार ही हीरो बनकर उभर रहे हैं और भाजपा जो अपने आपको सबसे समझदार पार्टी होने का दावा करती है, बुरी तरह से फ़ेल रही है. अभी भी विश्वास मत का नतीजा आना है और अगर भाजपा सरकार बचाने में नाकाम रही तो राज्य भाजपा के नेताओं की तो किरकिरी होगी ही, केन्द्रीय नेता भी आलोचना के शिकार होंगे. इस बीच ख़बर ये भी आ रही है कि अजीत पवार को मनाने की कोशिशें एनसीपी में तेज़ हैं और आज एनसीपी प्रमुख उनसे फ़ोन पर बात करेंगे.

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Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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