मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत में इस समय बस इसी बात की चर्चा है कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा. सबकी निगाहें शिवसेना पर टिकी हैं कि वो कोई निर्णायक फ़ैसला लेगी या नहीं. भाजपा और शिवसेना में इस समय मुख्यमंत्री पद को लेकर ही तकरार है. भाजपा चाहती है कि पाँच साल तक उसका मुख्यमंत्री रहे क्यूँकि उसकी पार्टी बड़ी है और सबसे अधिक सीटें विधानसभा चुनाव में उसे मिली हैं.

दूसरी ओर शिवसेना का दावा है कि विधानसभा चुनाव से पहले 50-50 की बात हुई थी और इस आधार पर मुख्यमंत्री पोस्ट भी ढाई-ढाई साल के लिए दोनों पार्टियों को मिले. शिवसेना इसको लेकर लिखित में आश्वासन चाहती है लेकिन भाजपा इस तरह का कोई आश्वासन देने को तैयार नहीं है. दिन बीतते जा रहे हैं और सरकार किसकी बनेगी ये सवाल बना हुआ है.

शिवसेना और भाजपा में किसी सहमति की ख़बर कल शाम को कुछ मीडिया हाउस ने दी ज़रूर थी पर आज वो ग़लत साबित हो रही है.शिवसेना नेता संजय राउत ने आज एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार से मीटिंग की है. राउत ने कहा कि पवार राज्य और देश के बड़े नेता हैं और वो महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट को लेकर परेशान हैं. उन्होंने कहा कि इसी मुद्दे पर हमने एक ब्रीफ़ डिस्कशन किया.

राउत ने भाजपा से बातचीत के विषय में कहा कि उनकी पार्टी किसी नए प्रस्ताव पर बात नहीं करेगी. उन्होंने कहा कि भाजपा और शिवसेना में मुख्यमंत्री पद को लेकर चुनाव से पहले समझौता हो गया था और इसी वजह से हम गठबंधन को तैयार हुए थे. भाजपा इस समय कुछ भी बोलने की स्थिति में नज़र नहीं आ रही है. उसके नेताओं को समझ नहीं आ रहा कि वो किस तरह से इस बात पर शिवसेना को मनाएँ.

भाजपा की मुश्किल ये भी है कि अगर उसने शिवसेना की बात मान ली तो कई और राज्यों में इस तरह की मांग उठ सकती है. दूसरी ओर पूरे देश में ये मैसेज जाएगा कि एक क्षेत्रीय दल के सामने भाजपा झुक गई. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की इस तरह की छवि है कि वो किसी भी सूरत में झुक कर समझौता नहीं करते लेकिन इस पूरे मामले पर उन्होंने भी चुप्पी साधी है.

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