राजद के पूर्व सांसद मुहम्मद शहाबुद्दीन की जेल में कोरोना से मौ’त हो जाने के बाद बिहार और ख़ासकर सीवान की सियासत ने कई मोड़ लिए हैं. कई तरह की ख़बरें सोशल मीडिया और मीडिया में आ रही हैं.अट’कलों के अलग अलग दौर चल रहे हैं कोई कह रहा है कि बाहुबली शहाबुद्दीन की पत्नी से जदयू संपर्क कर रही है तो कोई कह रहा है कि राजद ही शहाबुद्दीन परिवार की एकमात्र पार्टी है.

इस सबके बीच ख़बर है कि पूर्व सांसद के बेटे ओसामा शहाबुद्दीन को राजनीति में एंट्री मिल सकती है. सीवान में ये चर्चा जोर शोर से हो रही है कि ओसामा को शहाबुद्दीन की जगह मिलनी चाहिए. शहाबुद्दीन की राजनीतिक विरासत संभालने की रेस में सबसे ज्यादा उनके बेटे ओसामा शहाब का नाम चर्चा में है. ओसामा विदेश से पढ़ाई करके लौटे हैं और अभी तक वो सीवान के राजनीतिक माहौल से बहुत वाकिफ नहीं हैं.

शहाबुद्दीन के क़रीबी चाहते हैं कि ओसामा कमान संभाल लें. हालाँकि अगर ओसामा इसको लेकर तैयार नहीं हैं तो शहाबुद्दीन की पत्नी और ओसामा की माँ हिना शहाब पूरी तरह राजनीति में उतर जाएँ. जानकार मानते हैं कि सीवान की बाहुबली टाइप सियासत में ओसामा कितने फिट होंगे ये कहना मुश्किल है. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि ओसामा विदेश से पढ़े हैं. सीवान में शहाबुद्दीन और माले की राजनीतिक रंजिश चलती रही है और ये अभी ख़त्म होती भी नहीं दिख रही है.

शहाबुद्दीन के बारे में कहा जाता है कि राजद की स्थापना और राबड़ी देवी सरकार बनवाने में उनका अहम् रोल था. शहाबुद्दीन की पॉपुलैरिटी बिहार के मुस्लिम समुदाय में बहुत थी. उनकी मौ’त के बाद मुस्लिम समुदाय में उदासी देखी गई. शहाबुद्दीन के बारे में कहा जाता है कि वो भले बाहुबली थे लेकिन ग़रीब लोगों में उनकी इमेज बहुत अच्छी थी. कहा जाता है कि सीवान के मुस्लिम समुदाय के अलावा दूसरी जातियां भी शहाबुद्दीन को पसंद करती थीं.

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