अस्सलामोअलैकुम भाइयों और बहनों जैसा की आप लोग जानते है इस्लाम एक शांतिप्रिए मज़हब है इस्लाम हमको सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ देता है इस्लाम के मुख्य पांच पिलर है जिसको फॉलो करना हर मुसलमान का हक़ है इसी बीच आज हम आपको बताएंगे कि इस्लाम में किस तरह की औरतों से शादी करने के लिए कहा गया है। इस्लाम में औरतो का दर्जा बहुत बुलंद है निकाह एक सुन्नत है हज़रत मोहम्मद सल्ला० ने फ़रमाया लड़के और लड़किओं की सही वक़्त पर निकाह करवा देना चाहिए ताकि जिनाह से बच सके,लेकिन आज कल लोगो का ख्याल बदल रहा है। आज के वक़्त में लोगो का मन है की लड़का कमाने लगे तभी उसकी शादी करो नहीं तो मत करो.

इस्लाम में निकाह सुन्नत तरीके से करने का हुक्म है और वलीमे को अपने हैसियत के हिसाब से खूब धूम धाम से मानाने का हुक्म है।दोस्तों आज हम बात करेंगे निकाह के लिए इस्लाम के हिसाब से बेहतरीन औरत कोन सी है जो दुनिया और इस्लाम दोनों के ऐतबार से बेहतर हो आज कल ज़्यादातर देखने को मिलता है कि ज़यादा तर घरो में औरत की दीनदारी में कमी होने की वजह से घर टूट जाता है आपसी ताल्लुकात लड़ाई झगड़ा होने लगता है शौहर बीवी के लिए अपने माँ बाप को छोड़ देता है उनसे अलग रहने लगता है इसी लिए कहा गया है की निकाह उसी औरत से करो जो दीनदार हो जिसकी रूह खूबसूरत हो दीनदार औरतो से घर का माहोल दीनी हो जाता है बच्चो कि परवरिश भी बेहतर तरीके से होती दीनदार औरत कि वजह से घर का माहोल एकदम खुश गवार रहता है.

एक दिन एक आदमी हजरत अली रजि अल्लाहु अन्हो के पास आया और उसने उनसे पूछा हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु ने फरमाया इस जमीन पर दो तरह की औरतें रहती है –एक वह जो अपनी अदाओं को खूबसूरत बनाती हैं और दुसरी वो जो अपने किरदार को खूबसूरत बनाती है जो अपनी अदाओं को खूबसूरत बनाती हैं वह तुम्हें पसंद आएंगी.

जो औरत अपने किरदार को खूबसूरत बनाए वह तुम्हारी औलाद को पसंद आएगी ऐसे में तुम याद रखना की शादी करते वक्त अपनी बीवी न ढूंढे अपने बच्चों की मां ढूढों। मैंने अल्लाह के महबूब हुजूर सल्लल्लाहू अलैही वसल्लम से सुना की औरत के किरदार की झलक उसकी औलाद में पाई जाएगी। तुम आज अपने लिए जो भी बीवी चुनोगे उसका किरदार अपनी औलाद में पाओगे और वह तुम्हारे लिए सद्का-आ-ए ज़ारिया है.

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम ने फरमाया औरत वो लाओ जो दीनदार हो जो तुम्हारी नस्लो को चला सके घर का माहोल बेहतर बना सके मर्द में दीन होता है तो तुम तक रहता है। औरत में दीन होता है तो तुम्हारी नस्लों तक पहुंचता है अल्लाह ताला से हमेशा दीनदार औरत की तलब करना चाहिए.

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