रियाद: सऊदी अरब के बारे में कहा जाता है कि यहाँ का क़ानून बाक़ी देशों की अपेक्षा ज़्यादा कठोर है. कई बार इसको लेकर मानवाधिकार समूह अपनी बात रखता रहा है. सऊदी अरब में एक सज़ा की बहुत आलोचना होती है वो है कोड़े मारने की सज़ा. सऊदी अरब ने लेकिन अब इस सज़ा को ख़त्म करने का फ़ैसला कर लिया है. देश की उच्चतम न्यायलय ने एक फ़ैसला दिया है जिसके तहत कोड़े मारने की सज़ा को ख़त्म करने का एलान किया गया है.

माना जा रहा है कि सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान ने इस फ़ैसले में अहम् भूमिका निभाई है. वो लगातार सऊदी अरब को वैश्विक पटल पर लाने की कोशिश कर रहे हैं. सऊदी क्राउन प्रिंस द्वारा उठाया गया ये ताज़ा क़दम बहुत चर्चा में आने वाला है. मानवाधिकारों की ओर सऊदी अरब का ये एक बड़ा क़दम माना जा रहा है.उच्चतम न्यायलय ने कहा है कि ताज़ा सुधार अन्तराष्ट्रीय मानवाधिकारों के मापदंडों पर देश को लाने की कोशिश है.

न्यायलय ने कहा कि आने वाले वक़्त में कोड़े मारने की सज़ा की बजाय जुर्माना, जेल या फिर सामुदायिक सेवा जैसी सज़ा सुनाई जा सकती है. सऊदी अरब में क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान ने जबसे सत्ता संभाली है तब से ही उन्होंने देश के सिस्टम में कुछ बदलाव करने की कोशिश की है. उन्होंने इन बदलावों को विज़न २०३० का नाम दिया है.

इसका अर्थ है कि वो २०३० में देश को एक नए देश के तौर पर देखना चाहते हैं. मुहम्मद बिन सलमान के बारे में जानकार मानते हैं कि ये दुबई के रास्ते पर चलकर सऊदी अरब को यूरोप जैसा देश बनाना चाहते हैं. वो चाहते हैं कि इस्लाम के रास्ते पर चलते हुए ही देश को विकास के पथ पर और तेज़ी से आगे बढ़ाया जाए.

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