सपा के किसी भी दाँव को क्यूँ नहीं समझ पा रही है भाजपा, सब कुछ करके भी ये..

इटावा: उत्तर प्रदेश की सियासत इन दिनों कई क’रवटें बदल रही हैं। जिला पंचायत चुनाव के बाद प्रदेश में अब जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए मतदान होना है। जिला पंचायत सदस्य के चुनावों में मुख्य मुकाबला सबसे अधिक सीटें जीतने वाली सपा और सत्ताधारी दल भाजपा के बीच है। बसपा ने पहले ही घोषणा कर दी है कि वो जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनावों में भाग नही लेगी। कांग्रेस इन चुनावों में दर्शकों की भूमिका में है।

जिला पंचायत चुनावों में हार के बाद से ही सत्ताधारी दल भाजपा ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर जीत हासिल करने के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगा दिया है। राज्य के नेताओं से लेकर राष्ट्रीय नेताओं ने ता’बड़तोड़ बैठकें करके चुनाव जीतने के लिए अभेद च’क्रव्यूह की रचना की। इसी र’णनीति के तहत भाजपा ने सूबे के 22 अध्यक्ष पदों पर क’ब्ज़ा जमा लिया। वहीं दूसरी तरफ सपा ने भाजपा पर सपा प्रत्यशियों के पुलिस उ’त्पीड़न,ड’रा ध’मकाकर झूठे मुकदमे लादने का आरोप लगाया है।

65 सीटें जीतने का लक्ष्य तय करके मैदान में उतरी भाजपा ने हर सीट को जीतने के लिए शाम,दाम,दं’ड,भेद की नीति अपनाई है। लेकिन भाजपा की यह नीति सपा के गढ़ इटावा में धरी की धरी रह गयी। लगभग 30 सालों से इटावा में जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर काबिज़ सपा को हराने के लिए भाजपा ने जी’तोड़ कोशिश की थी। मुख्यमंत्री योगी से लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने इटावा में सपा को ह’राने के लिये हर सम्भव प्रयास कर डाले थे। लेकिन अखिलेश यादव व चाचा शिवपाल यादव के गठजोड़ ने भाजपा के इटाव जीतने के मंसूबों पर पानी फेर दिया।

यहाँ सपा प्रत्याशी व अखिलेश यादव के चचेरे भाई अभिषेक यादव ने दुबारा निर्विरोध मैदान फतह कर लिया। भाजपा यहां जीतना तो दूर अपना प्रत्याशी तक उतार नही पाई।2017 में इटावा की 2 विधानसभा सीटों व 2019 में 1 संसदीय सीट पर क’ब्ज़ा करने वाली भाजपा को जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर प्रत्याशी उतारने के लिए प्रस्तावक ढूंढे नही मिले। इटावा की 24 जिला पंचायत सदस्यों की सीटों पर सपा ने 9 ,प्रसपा ने 8,बसपा ,भाजपा ने 1-1 व निर्दलीयों ने 5 सीट पर जीत हासिल की थी। लेकिन बीजेपी को पटखनी देने में अखिलेश यादव व शिवपाल यादव के गठजोड़ की मुख्य भूमिका रही।

दोनो ने मिलकर भाजपा के हर च’क्रव्यूह को भेद डाला। इटावा जिला पंचायत अध्यक्ष पर समाजवादी पार्टी का कब्जा करीब 30 से बरकरार है। सपा के प्रोफेसर रामगोपल यादव 1987 में पहली बार जिला पंचायत अध्यक्ष बने थे। इसके बाद शिवपाल सिंह यादव ने सीट पर कब्ज़ा बरकरार रखा। वहीं, 2006 में मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई राजपाल यादव की पत्नी ने प्रेमलता यादव ने जीत दर्ज की और लगातार दो बार कब्ज़ा किया। इसके बाद 2016 में पहली बार जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी हासिल करने वाले मुलायम सिंह यादव के भतीजे अशिषेक यादव ने इस बार भी अपना द’बदबा कायम रखा है। यही नहीं, अपनी जीत के बाद उन्होंने कहा कि यूपी की जनता परिवर्तन चाहती है और छह महीने बाद भाजपा का साफ होना तय है।

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Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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