नई दिल्ली: भाजपा-शिवसेना गठबंधन में अब ये कहा जा सकता है कि बात काफ़ी बढ़ गई है.दोनों पार्टियों के नेता अब मीडिया के ज़रिये एक दूसरे को सन्देश दे रहे हैं. दोनों ही अलग-अलग ये साबित करने की कोशिश में हैं कि मुख्यमंत्री की कुर्सी पर हक़ उनका है. हालाँकि शिवसेना लगातार ये कह रही है कि 50-50 फ़ॉर्मूला की बात हुई थी तो उस हिसाब से ढाई-ढाई साल का मुख्यमंत्री होना चाहिए.

इस बीच भाजपा ने बयान दिया कि मुख्यमंत्री पद पर उनका ही हक़ है और शिवसेना को समझना चाहिए कि 50-50 फ़ॉर्मूला का ये अर्थ नहीं है. वहीँ शिवसेना इस बात से ख़ासी नाराज़ नज़र आ रही है और विकल्प तलाशने की चेतावनी दे रही है. शिवसेना की मांग मुख्यमंत्री पद को लेकर है. भाजपा इस बारे में कुछ भी सुनने को तैयार नहीं दिख रही है.अब शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने एक टीवी चैनेल को इंटरव्यू देकर साफ़ कर दिया है कि भाजपा उसे और विकल्प ढूँढने पर मजबूर न करे.

राउत ने कहा कि उसे विकल्प तलाशने के लिए धकेलना नहीं चाहिए और ‘राजनीति में कोई भी संत नहीं है.’ उन्होंने NDTV से बात करते हुए शिवसेना के कांग्रेस-एनसीपी के साथ जाने की बात पर इनकार नहीं किया. उन्होंने कहा कि शिवसेना गठबंधन की पवित्रता पर यक़ीन रखती है. संजय राउत ने कहा, ‘सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट रूप से कहा है कि हम भाजपा की प्रतीक्षा करेंगे. लेकिन हमें अन्य विकल्पों की तलाश करने के लिए मजबूर न करें. हम ऐसा पाप नहीं करना चाहते.’

उन्होंने इशारों में कहा कि कांग्रेस-एनसीपी का समर्थन लेने से इनकार नहीं किया जा सकता और राजनीति में कोई भी साधू-संत नहीं है. उन्होंने हालाँकि ये भी कहा कि शिवसेना के कुछ सिद्धांत हैं और वो उन पर चलती है. संजय राउत ने कहा कि भाजपा अपने वादे से मुकर नहीं सकती., ‘वे (भाजपा) अपने वादे से नहीं मुकर सकते.’ यह उनका हमारे साथ समझौता है. इसको समझाना चाहिए.

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