मुंबई: सियासत एक ऐसी चीज़ है जिसमें चुनाव की बड़ी एहमियत है. चुनाव में ही ये तय होता है कि सत्ता किसके पास रहेगी और किसके पास नहीं रहेगी. महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव हैं और सभी दल सत्ता को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रहे हैं. चुनाव से पहले सभी दल आंतरिक मनमुटाव से जूझ रही हैं लेकिन कांग्रेस में ये अधिक उभर कर आ रहा है. कांग्रेस पार्टी के कई नेता टिकट बंटवारे से नाराज़ बताये जा रहे हैं.

कुछ दबी ज़बान में बात कर रहे हैं तो कुछ ऐसे भी हैं जो खुलकर अपने मन की बात रख रहे हैं. इन्हीं में से एक नेता हैं संजय निरुपम. निरुपम पहले मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके हैं और पार्टी से सांसद भी रह चुके हैं परन्तु इस बार उनकी कुछ भी सुनी नहीं जा रही है. निरुपम का कहना है कि उन्होंने वर्सोवा सीट के लिए जिस उम्मीदवार को बताया था उसको टिकट नहीं दिया गया. उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर ही कुछ लोग पार्टी के ख़िलाफ़ काम कर रहे हैं.

संजय निरुपम ने दावा किया कि राहुल गांधी के क़रीबियों को कम एहमियत दी जा रही है. उन्होंने कहा कि मुंबई शहर में जितनी विधानसभा सीटें हैं उनमें से ३-४ ही सीटें कांग्रेस जीत सकेगी और बाक़ी सभी में हार होगी. उन्होंने तो यहाँ तक कह दिया कि अधिकतर सीटों पर ज़मानत भी नहीं बचेगी. उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा,”जिस तरह से मुंबई में उम्‍मीदवारों का चयन किया गया, आप तीन-चार सीटें छोड़ दें तो बाकी सभी पर कांग्रेस की जमानत तक जब्‍त हो जाएगी.”

निरुपम ने पहले ही कह दिया है कि वो पार्टी के लिए प्रचार नहीं करेंगे. उन्होंने अपनी ही पार्टी को चुनौती देते हुए कहा कि अब वो पत्रकारों से तब मिलेंगे जब रिजल्ट आ जायेंगे. निरुपम ने गुरुवार को घोषणा की थी कि वह 21 अक्टूबर को प्रस्तावित विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए प्रचार नहीं करेंगे. उन्होंने कहा, “मुझे विधानसभा चुनाव प्रक्रिया में कोई भूमिका नहीं दी गई. मेरे लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में ही (विधानसभा) टिकट के बंटवारे के दौरान मेरे विचारों पर ध्यान नहीं दिया गया.”

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