सहाबी ने लगाई मदद के लिए आवाज़, अल्लाह ने ज़मीन पर भेजा फ़रिश्ता….दुआ क़ुबूल नहीं होती तो ज़रूर पढ़ें ये..

अस्सलाम ओ अलैकुम, हम अक्सर आपके लिए मज़हब की बातें लेकर आते हैं. आज हम एक बार फिर लेकर आ गए हैं दीन की एक और बात लेकर जो काफ़ी अहम् है. ये कथा हर किसी को सुननी चाहिए. हम लोग ये कहते फिरते हैं कि हमारी दुआ क़ुबूल नहीं होती है. इस बात की लेकिन बहुत सी वजहें हैं. हमारी दुआ के कुबूल होने में तीन चीज़ों को दूर किया जाना अहम् हैं.. ये तीन चीज़ें हैं- इख़लास का फ़ुक़दान,बद अमली और हराम रोज़ी.इन तीन मनफ़ी अवामिल को दूर कर दिया जाये तो दुआएं बिलाशुबा क़बूल होंगी.

इंसान अगर पाबंदी के साथ नमाज़ पढ़े और अल्लाह से डरे, अल्लाह और रसूल से सच्ची मुहब्बत करे तो अल्लाह ताला ज़रूर बंदे की दुआ सुनेगा और अपने बंदे की मदद करेगा।नमाज़ रब की ख़ालिस इबादत मोमिन की ज़िंदगी और मक़्सद-ए-हयात है।एक लम्हा दूसरी जानिब इलतिफ़ात का मौक़ा नहीं नमाज़ के वक़्त में नमाज़ क़ायम करना है.यानी वक़्त-ए-नमाज़ को भी मोख़र नहीं कर सकते और क्योंकर माफ़ हो ये तो मक़्सद-ए-हयात है।

नबी सललल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम फ़राइज़ के इलावा सुन्नत की अदायगी इस क़दर करते कि पांव में वर्म आजाता।आप हर परेशान कुन मुआमला में नमाज़ का सहारा लेते।इस लिए हम देखते हैं कि मसाइब के मवाक़े पर नमाज़ का हुक्म है,बारिश की नमाज़,सूरज और चांद गरहन की नमाज़,और ज़लज़ला की नमाज़ वग़ैरा। दोस्तों नमाज़ पढ़ने से कई मुसीबतें टल जाती हैं,हज़रत उमर रज़ी अल्लाहु ताला अनहु के जमाने का एक वाकया है कि एक सहाबी तायफ से वापस आ रहे थे,कि रास्ते में उन्हें एक चोर ने पकड़ लिया,तो सहाबी ने उस चोर से कहा कि मुझे छोड़ दो, और बदले में मेरे पास जितना सामान है,वह सब ले लो,लेकिन चोर ने कहा कि मैं सामान भी लूँगा.

और साथ में तुम्हें क’त्ल भी करूंगा क्योंकि अगर मैं तुम्हें क’त्ल नहीं करूंगा तो तुम मदीने जाकर हज़रत उमर रज़ी अल्लाहु ताला अनहु से मेरी शिकायत करोगे।सहाबी ने जब यह बात सुनी तो उस चोर से कहा कि मुझे दो रकात नमाज़ पढ़ लेने और सहाबी नमाज़ पढ़ कर दुआ मांगने लगे,इतने में चोर ने चाहा कि आप को क’त्ल कर दे. इसी वक़्त सहाबी ने अल्लाह से मदद मांगी,और एक आवाज़ आई कि इन्हें क’त्ल मत करो,इसी तरह कई बार चोर ने चाहा कि सहाबी को क’त्ल कर दे, लेकिन हर बार यही आवाज़ आती रही कि इन्हें मत क’त्ल करो।

इसी दौरान एक घोड़े पर सवर शख्स वहाँ पर पहुंचे, और उस चोर को नेज़ा मा’रा जिस से वह ज़मीन पर गिर पड़ा और आग का गोला बन गया। अल्लाह के रसूल सललल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम के सहाबी ने आने वाले शख्स से पूछा तुम कौन हो,तो उन्होंने कहा कि मैं फरिश्ता हूँ,जब तुम ने अल्लाह ताला को मदद के लिए पुकारा था,तो अल्लाह ताला ने कहा कि कौन है, जो मेरे बंदे की मदद करेगा।और फिर मैं तैयार हो गया,उस वक़्त में सातवें आसमान पर था,और जब तुम मदद के लिए पुकार रहे थे,उस वक्त मैं ही आवाज़ दे रहा था कि इन्हें मत क’त्ल करो।

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Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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