एक समय वो था जब संयुक्त राज्य अमरीका ने साम्यवा’द और USSR को रोकने के लिए नाटो जैसा गु’ट बनाया था और उसमें तुर्की को शामि’ल किया था. तुर्की ने अमरीका का साथ पूरी ईमानदारी से निभाया और USSR के विघटन के बाद भी ये साझेदारी मज़बूती से चलती रही. यही वजह थी कि सीरिया में जब गृह यु’द्ध हुआ तो तुर्की और अमरीका एक साथ थे परन्तु राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सत्ता में आने के बाद से ही दोनों देशों के स’म्बन्ध बिगा’ड़ की स्थिति में हैं.

जानकार मानते हैं कि ट्रम्प बहुत से फ़ैसले जल्दबाज़ी में कर लेते हैं. यही वजह है कि उन्होंने अमरीका के कई दोस्तों को विरो’धी बना दिया. तुर्की की बात करें तो शायद ये कई सालों में पहली बार है जब वो रूस के इस क़दर नज़दीक आ गया है. असल में अमरीका ने कुछ इस तरह की श’र्तें रखी कि तुर्की को नया साथी ढूँढना ही था. रूस और तुर्की के बीच फ़ा’इटर जेट को लेकर हुई बातचीत अब अपना रिज’ल्ट देने की स्थिति में है.

रूस के एक बड़े अधिकारी ने कहा है कि रूस और तुर्की अब रूस-निर्मित फा’इटर जेट की डिलीवरी पर चर्चा कर रहे हैं. मि’लिट्री-तकनीक कारपोरेशन की फ़ेडरल सर्विस के अध्यक्ष दमित्री शुगयेव ने कहा कि तुर्की में डिफेन्स इंडस्ट्रीज़ के अध्यक्ष इस्माइल देमिर से मुलाक़ात होने वाली है. उन्होंने बताया कि सु-35 या सु-57 की डि’लीवरी को लेकर बात की जायेगी. उन्होंने हालाँकि कहा कि अभी कॉन्ट्रैक्ट के बारे में कोई बात करना जल्दबाज़ी होगी.

इसके अतिरिक्त शुगयेव ने कहा कि दोनों देशों इलेक्ट्रॉनिक मिलि’ट्री सामान के बारे में भी चर्चा करने जा रहे हैं.आपको बता दें कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और तुर्की राष्ट्रपति रजब तैयब एरदोगन के बीच मुलाक़ात हुई थी. दोनों ही शीर्ष नेताओं ने संबंधों के बारे में सका’रात्मक बात कही थी. इस पूरे मामले में फ़िलहाल अमरीका अलग-थलग पड़ता दिख रहा है. अब आगे अमरीका क्या कूटनीति अपनाता है ये देखने की बात होगी.

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