राव’ण के इस रूप का पता चलेगा तो दशहरे में नहीं ज’ला पाएँगे उसका पुतला

दशहरा क़रीब ही है और ऐसे में हमारे मन में राम के साथ-साथ राव’ण का नाम भी कौं’धता है। राम को लेकर जाने कितनी ही बातें कहीं गयीं हैं और उनके म’र्यादा पुरुषोत्तम रूप का बखान भी हमने सुना है, पढ़ा है लेकिन रामायण के कई किरदारों के बारे में हम सिर्फ़ उतना ही जानते हैं जितना रामायण या रामचरितमानस में उल्लेखित है। ऐसे कई किरदार हैं जिनके बारे में हम पूरी तरह से नहीं जानते, जैसे बाली, सुग्रीव यहाँ तक कि हनुमान के बारे में भी कई अलग-अलग बातें पढ़ने मिलती हैं।

लेकिन इन सबमें भी सबसे रोचक बात जो अब तक पढ़ने में आयी वो बात रामायण के ही नहीं बल्कि राव’ण के बारे में हमारे विचार बदलने पर मज’बूर कर देती है। रामायण में राम का वनवास जाना जितनी बड़ी घ’टना मानी जाती है उतनी ही बड़ी घ’टना है सीता हर’ण। राव’ण को आमतौर पर हम रामायण का वि’लेन ही मानते हैं क्योंकि एक औरत का हर’ण करना उस श्रेणी में आता भी है। फिर राव’ण को देखने का नज़रिया बद’लने का कार’ण क्या हो सकता था? नज़रिया तो बद’लता ही आप ही सोचिए अगर आपको पता चले कि रा’वण सीता का पिता है तो?

जी हाँ, ये बात बड़ा आश्चर्य पैदा करती है क्योंकि ऐसा हो सकता है इस बारे में कभी विचार ही नहीं किया। वैसे आपको ये बता दें कि वाल्मीकि के रामायण और तुलसीदास के रामचरितमानस के अलावा भी कई अलग तरह के रामायण मौजूद हैं और उनमें कहानी बिलकुल अलग है। अब ये रामायण कहाँ मिलेंगे ये तो पता नहीं है लेकिन कुछ लेखकों ने इस रामायण को लेकर अलग-अलग किताबें लिखी है जो काफ़ी लोकप्रिय भी हैं जैसे “आनंद नीलकंठन” की किताब “अ’सुर: परा’जितों की गाथा” (अंग्रेज़ी- Asura: The tale of Vanquised) राव’ण की इस कहानी से लोगों को मिलाती है।

पूर्वपीठिका

वहीं “अमीश त्रिपाठी” की किताब “राव’ण: आर्यवर्त का श त्रु” (अंग्रेज़ी- Ravan: Enemy of Aryavarta), जो रामायण पर आधारित शृंखला का हिस्सा है। ये किताब क्योंकि काल्पनिकता लिए हुए हैं इसलिए इस कहानी को अलग तरह से पेश करती है। लेकिन अब तक सबसे विस्तार से अगर इस विषय में किसी किताब में लिखा गया है तो वो किताबें हैं रेडग्रैब बुक्स से आयीं “सुलभ अग्निहोत्री” की राम रावण गाथा सिरीज़, ये सिरीज़ पाँच खंडों की सिरीज़ है जिसमें से अब तक तीन खंड प्रकाशित हो चुके हैं।

पहली दो किताबों, “पूर्व पीठिका” (अंग्रेज़ी- The Forefathers) और “दशानन” (अंग्रेज़ी- Dashanan) में राव’ण की इस कहानी का उल्लेख मिलता है। यहाँ राव’ण का हर रूप सामने आता है और उसे पर्याप्त जगह मिलती है। इस शृंखला की ख़ास बात है कि इनमें न सिर्फ़ राव’ण बल्कि रामायण के अलग-अलग किरदारों को भी उतना मौक़ा मिला है जिससे उनका व्यक्तित्व खुलकर सामने आता है।

ये कहानियाँ पूरे विस्तार से सारी बातों से अवगत करवाती हैं यहाँ कहानी राम और राव’ण से न शुरू होकर उनके पूर्वजों से शुरू होती है और पढ़ने वाले को ऐसी जानकारियाँ मिलती हैं जो अब तक किसी एक ही किताब से नहीं मिल पायीं हैं। जहाँ “पूर्व पीठिका” में राम और रावण के पितामह से कहानी की शुरुआत होकर सीता के जन्म पर ख़त्म होती है। वहीं अगले खंड “दशानन” में कथा का केंद्र रावण है, इसमें राम हीरो ज़रूर हैं मगर रावण विलेन नहीं हैं।

दशानन

इन सभी किताबों की ख़ासियत है कि सारी ही किताबें अंग्रेज़ी और हिंदी दोनों भाषाओं में उपलब्ध हैं। वहीं “आनंद नीलकंठन” की किताब “असुर: परा’जितों की गाथा” और ”अमीश त्रिपाठी” की किताब “राव’ण: आर्यावर्त का श’त्रु” कुछ अन्य भाषाओं में भी उपलब्ध हैं।

हम तो कहेंगे कि इस दशहरे के मौक़े पर राव’ण का पुतला जलाने से पहले उसके बारे में जान लेना ज़रूरी है। पुराण हों या ग्रंथ हर पहलू की जानकारी ज़रूरी होती है और कहीं न कहीं लिखी हुई भी है बस आम लोगों तक वो बातें पहुँच नहीं पातीं। पर अब जब कुछ लेखकों ने उसे आम लोगों तक सहज सुलभ कर दिया है तो लोग भी उसे हाथोंहाथ ले रहे हैं । जैसे हर दशहरे की तरह इन दिनों भी ये किताबें काफ़ी बड़ी मात्रा में ख़रीदी जा रही हैं और सुलभ अग्निहोत्री की राम राव’ण सिरीज़ की माँग इन दिनों काफ़ी बढ़ गयी है।

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Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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