रामविलास पासवान की जयंती पर चिराग और पारस गुट ने जताई एलजेपी पर दावेदारी ? किसका पलड़ा भारी रहा ?

July 6, 2021 by No Comments

पटना: लोकजनशक्ति पार्टी में द’रार पड़ने से इन दिनों चिराग पासवान और उनके चाचा पशुपति कुमार पारस के बीच टकराव की स्थिति किसी से छिपी नही है। एलजेपी अब 2 गुटों में बंट चुकी हैं। इन दोनों ही गुटों ने बिहार में दिवंगत रामविलास पासवान की जयंती पर 5 जुलाई को शक्तिप्रदर्शन किया। दिवंगत रामविलास पासवान के छोटे भाई, चिराग पासवान के चाचा व बा’गी गुट का नेतृत्व करने वाले पशुपति कुमार पारस ने पटना में एलजेपी के दफ्तर में रामविलास पासवान की जयंती मनाई। जयंती कार्यक्रम के दौरान पारस ने पीएम मोदी से आग्रह किया कि दिवंगत रामविलास जी को दूसरा अम्बेडकर माना जाता है।

इसलिए उन्हें भारत रत्न दिया जाए। दूसरी तरफ उन्होंने सीएम नीतीश कुमार से गुज़ारिश की कि एलजेपी दफ्तर के बंगले को रामविलास पासवान के नाम पर राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया जाए। वहां उनकी एक आदमकद की मूर्ति लगवाएं। दूसरी ओर दिवंगत रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान अपने पिता की जयंती पर 5 जुलाई से अपनी आशीर्वाद यात्रा की शुरुआत की। चिराग के पटना एयरपोर्ट पहुचने से पहले ही वहां समर्थकों की भीड़ जुटी थी। चिराग एयरपोर्ट के बाहर आने के बाद पटना हाईकोर्ट के पास मौजूद आम्बेडकर मूर्ति पर माला चढ़ाने पहुंचे लेकिन पार्क का गेट बंद था।

इसे लेकर चिराग वहीं धरने पर बैठ गए और सरकार के खि’लाफ नारेबाजी की। उन्होंने आ’रोप लगाया कि उन्हें आम्बेडकर का आर्शीवाद लेने से रोका जा रहा है। इसके बाद चिराग अपने काफिले के साथ रामविलास पासवान की कर्मभूमि और चाचा पशुपति पारस के लोकसभा क्षेत्र हाजीपुर के लिए निकल गए। जहां उन्होंने अपनी गाड़ी की छत से बाहर निकलकर लोगों का अभिनंदन ग्रहण किया। चिराग पर लोगो द्वारा फूलों की वर्षा भी की गई। जिसे देख चिराग काफी खुश हुए।

जब चिराग हाजीपुर के सुल्तानपुर गांव में पहुंचे तो ‘देखो-देखो कौन आया, शेर आया-शेर आया’ और ‘धरती गूंजे आसमान, रामविलास पासवान’ के नारे लगने लगे। दिवंगत रामविलास पासवान की जयंती पर 5 जुलाई को एक तरह से चिराग और पारस इन दोनों ने ही अपनी दावेदारी जताई। पारस द्वारा आयोजित कार्यक्रम में करीब 700 से लोग मौजूद थे, वहीं चिराग पासवान की आशीर्वाद यात्रा में इससे ज़्यादा तो गाड़िया ही थीं। चिराग की आशीर्वाद यात्रा के कारण जाम तक लग गया। एलजेपी पर किसका अधिकार होगा यह तो चुनाव आयोग ही तय करेगा लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार चिराग को ज़्यादा जनसमर्थन मिलता दिख रहा है।

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