जयपुर: कहते हैं कि ख़ुदा के घर देर है अंधेर नहीं है. हालाँकि कभी-कभी देर भी काफ़ी देर हो जाती है. राजस्थान उच्च न्यायलय ने लम्बे समय से जेल में बंद 6 लोगों को बा-इज़्ज़त बरी कर दिया है. ये लोग 22 मई 1996 में हुए दौसा ब’म-वि’स्फोट में पकड़े गए थे. अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा वि’स्फोट को अंजाम देने की साजिश के साथ किसी भी संबंध को साबित करने में विफल रहने के बाद छह आरोपियों को बरी कर दिया।

दौसा जिले के महवा थाना क्षेत्र के अंतर्गत सामलेटी के पास शाम 4 बजे आगरा-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक राज्य द्वारा संचालित बस में विस्फोट होने से जयपुर और भरतपुर के लोगों सहित 14 यात्रियों की जान चली गई और 39 अन्य घा’यल हो गए थे। पिछले 23 साल से ज़मानत को तरस रहे इन लोगों को 2014 में एक स्थानीय अदालत ने दो’षी ठहराया और आजीवन का’रावास की स’जा सुनाई।

सोमवार को राजस्थान उच्च न्यायलय ने फ़ैसला सुनाया और जम्मू-कश्मीर के डोडा ज़िले के जावेद खान, अब्दुल गनी, लतीफ अहमद, मोहम्मद अली भट, मिर्जा निसार हुसैन (सभी श्रीनगर से) और उत्तर प्रदेश के आगरा के रहने वाले राहुल बेग़। हालाँकि, जस्टिस सबीना और गोवर्धन बर्दर की खंडपीठ ने धमाके में शामिल होने के लिए पप्पू उर्फ ​​सलीम को पेशे से डॉक्टर अब्दुल हमीद की मृ’त्यु’दंड और आजीवन का’रावास की स’जा को बरकरार रखा।

द इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक़, पुरुषों ने मंगलवार को जेल से बाहर आने के बाद बताया कि वे एक-दूसरे से अनजान थे जब तक कि सीआईडी ​​ने उन्हें मामले में आरोपी नहीं बना दिया। गनी कहते हैं, “हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि हम जिस दुनिया में कदम रख रहे हैं।” जब हम अंदर थे, तो हमने खोए हुए रिश्तेदारों को छोड़ दिया मेरी मां, पिता और दो चाचा गुजर गए। हम बरी हो चुके हैं, लेकिन उन वर्षों को कौन वापस लाएगा, ”बेग कहते हैं।

ग़नी की बहन सुरैया (62) ने जम्मू से फोन पर बात करते हुए कहा:”उनकी जवानी बीत गई, हमारे माता-पिता मर गए, मेरे आँसू सूख गए और मैं उनके लिए रोती-रोती बूढी हो गई। मेरा दिल कल से तेजी से धड़क रहा है। मुझे कुछ दिन दे दो, पहले उन्हें घर आने दो, मैं तुम्हें सब कुछ बता दूंगी।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *