भोपाल: मध्य प्रदेश की सियासत तेज़ रफ़्तार से चल रही है. कांग्रेस की सरकार पर संकट नज़र आ रहा है लेकिन मुख्यमंत्री कमलनाथ ये दावा कर रहे हैं कि कोई संकट नहीं है. उनका दावा है कि सरकार पाँच साल पूरे करेगी. कांग्रेस और भाजपा दोनों ही अपनी अपनी ओर से चाल चलने में लगे हैं. पहली बाज़ी भले भाजपा के पक्ष में गई हो लेकिन कांग्रेस इतनी जल्दी हार मानने को तैयार नहीं है. असल में कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया और अपने साथ 22 विधायकों का इस्तीफ़ा भी विधायक पद से दिलवा दिया.

भाजपा ने कांग्रेस के 22 विधायकों को साध तो लिया है लेकिन कमलनाथ कैम्प बाज़ी पलटने की पूरी कोशिश कर रहा है. दावा यहाँ तक किया जा रहा है कि भाजपा के कई विधायक कांग्रेस के पक्ष में आ सकते हैं. असल में कांग्रेस का पहला प्लान ये है कि जो बेंगलुरु में विधायक हैं उनको मनाया जाए. अब मुश्किल ये है कि उनसे बातचीत कैसे हो क्यूँकि कथित रूप से भाजपा ने उन्हें एक रिसोर्ट में रखा है. हालाँकि कांग्रेस ने अपना पूरा ज़ोर वहाँ लगा दिया है.

कांग्रेस नेता एक और प्लान पर काम कर रहे हैं और वो है कि भाजपा विधायकों को कैसे अपने पाले में किया जाए. भाजपा के कुछ विधायक ज़रूर हैं जो कांग्रेस के संपर्क में हैं लेकिन वो तब तक पाला नहीं बदलेंगे जब तक उन्हें ये भरोसा न हो कि कांग्रेस सरकार बचा पाएगी. कांग्रेस जहां सक्रिय रूप से भाजपा विधायकों को साधने में लगी है वहीँ भाजपा अब ये कोशिश कर रही है कि कांग्रेस को अब किसी तरह कामयाब न होने दिया जाए.

वहीँ ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भाजपा का दामन थाम लिया है. उनको भाजपा ने राज्यसभा उम्मीदवार भी बना दिया है. भाजपा उन्हें केंद्र में मंत्री भी बना सकती है. भाजपा सिंधिया को तो पूरा सम्मान दे रही है पर ख़बर है कि शिवराज सिंह चौहान पार्टी से बहुत ख़ुश नहीं हैं. असल में भाजपा चाहती है कि मुख्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा बनें और ये बात पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को अच्छी नहीं लग रही है. वो पहले इस घटनाक्रम से ख़ुश थे लेकिन अब वो उतने ख़ुश नज़र नहीं आ रहे.

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