चंडीगढ़: पंजाब में सत्ताधारी कांग्रेस में इन दिनों सब कुछ ठीक नही चल रहा है। रोज़ाना किसी न किसी वि’वाद में पड़ते मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की राजनैतिक साख क’मज़ोर होती दिख रही है। एक तरफ आगामी वर्ष पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं। कांग्रेस को पिछला प्रदर्शन दोहराने का द’बाव तो है ही साथ मे संगठन के भीतर उठे अ’सन्तोष को भी शांत करना है। ऐसे में मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह दोहरे दबाव की मा’र को झेल रहे हैं। बीजेपी से आम आदमी पार्टी फिर वहां से कांग्रेस में आये नावजोत सिंह सिद्दू और कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच का वि’वाद अब कांग्रेस के लिए ना’सूर बन चुका है। कांग्रेस के राज्य से लेकर आलाकमान तक के नेताओं ने इन दोनों के बीच जारी वि’वाद को हल करने के सारे उपाय कर लिए हैं लेकिन बी’मारी जस की तस बनी हुई है।

आगामी विधानसभा चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए कांग्रेस पर यह दबाव भी है कि अंदर की गु’टबाजी को जितनी जल्दी हो हल करके चुनाव को तैयारियों में जुटा जाए। विवाद का कोई हल न निकलने पर अब नावजोत सिंह सिद्धू और कैप्टन के बीच की ल’ड़ाई राहुल गांधी के दरवाज़े पर आ गई है। 29 जून को नावजोत सिंह सिद्धू दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाक़ात करेंगे। ऐसे में माना जा रहा है कि इस मुलाकात के बाद हो सकता है नावजोत सिंह सिद्धू और कैप्टन के संबंधों के बीच जमी बर्फ कुछ पिघले।

आपको बताते चलें कि इन दोनों नेताओं के बीच वि’वाद की शुरुआत पंजाब में 2017 मार्च में हुए विधानसभा चुनाव में हुई। इस दौरान भाजपा छोड़ चुके नवजोत सिंह सिद्धू राजनीति में नए विकल्प तलाश कर रहे थे। ऐसा कहा जाता है कि आम आदमी पार्टी से लेकर कई अन्य मोर्चों में शामिल होने के उनके पास कई विकल्प थे। कांग्रेस हाईकमान से भी इनकी बात चल रही थी। इसके बाद सिद्धू की चुनाव से करीब दो माह पहले जनवरी 2020 में कांग्रेस में धमाकेदार एंट्री हुई थी। चुनाव प्रचार के दौरान से ही यह अ’टकलें लगाई जा रही थीं कि अगर कांग्रेस सरकार बनती है तो उनका डिप्टी सीएम बनना तय है। ऐसा माना जा रहा था कि वे डिप्टी सीएम बनने की शर्त पर ही कांग्रेस में शामिल हुए हैं। हालांकि कांग्रेस हाईकमान ने इस बात को कभी सार्वजनिक नहीं किया था।

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