राष्ट्रपति कोविंद ने अभिभाषण में उठाया तीन ‘त’लाक़’ और ‘हलाला’ का मुद्दा, ये कहा..

नयी सरकार के गठन होने के बाद राष्ट्रपति के अभिभाषण की देश में पुरानी परम्परा है. अक्सर इस परम्परा को औपचारिक समझा जाता रहा है. माना ये जाना है कि ये नई गठित सरकार का एजेंडा होता है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सांसदों के सामने अपना अभिभाषण प्रस्तुत किया लेकिन इनमें उन्होंने त्रिपली तलाक़ और हलाला जैसी प्रथा का ज़िक्र भी किया.

हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव के नतीजों को राष्ट्रपति ने ‘‘भारत की विकास यात्रा जारी रखने के लिए जनादेश’’ बताया.राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गुरुवार को कहा कि सरकार ने किसान,व्यापारियों समेत समाज के सभी वर्गों के लिये कई अहम फैसले लेकर उन पर अमल शुरू कर दिया है. उन्होंने कहा कि सरकार एक मजबूत,सुरक्षित और समावेशी भारत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है.

सत्रहवीं लोकसभा के पहले सत्र में संसद के दोनों सदनों की संयुक्त है.बैठक को ऐतिहासिक केन्द्रीय कक्ष में संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि लोकसभा के इतिहास में सबसे बड़ी संख्या में,78 महिला सांसदों का चुना जाना नए भारत की तस्वीर प्रस्तुत करता है.इस लोकसभा में लगभग आधे सांसद पहली बार निर्वाचित हुए हैं. उन्होंने तीन तलाक प्रथा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में हर बहन-बेटी के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करने के लिए ‘तीन तलाक’ और ‘निकाह-हलाला’ जैसी कुप्रथाओं को हटाना जरूरी है.

मैं सभी सदस्यों से अनुरोध करूंगा कि हमारी बहनों और बेटियों के जीवन को और अधिक सम्मानजनक एवं बेहतर बनाने वाले इन सभी प्रयासों में अपना सहयोग दें. उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले 21 दिनों में किसान,व्यापारियों समेत समाज के सभी वर्गों के लिये कई फैसले किये और उन पर अमल शुरू कर दिया है. उन्होंने कहा कि देश को एक मज़बूत और समावेशी भारत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

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