PM मोदी के ‘हनुमान’ के समर्थन में उतरे तेजस्वी यादव, नीतीश कुमार के…

पटना: जैसे-जैसे कोसी का पानी बिहार को अपने च’पेट में लेने की कोशिश कर रहा है। वैसे-वैसे बिहार की राजनीति भी अपने उफ़ान पर पहुंच रही है। आरजेडी प्रमुख तेजस्वी यादव आये दिन नीतीश कुमार के ऊपर ह’मला बोलते ही रहते हैं। चाहे रोज़गार का मुद्दा हो या पेट्रोल के बढ़े दामों का या नियुक्ति में घो’टाले का मामला हो तेजस्वी नीतीश सरकार को कटघरे में खड़ा करते ही रहते हैं।

कभी कभी तो तेजस्वी के बयानों का समर्थन नीतीश कुमार के अपने मंत्री विधायक करने लगते हैं। जिससे बिहार सरकार की कई बार किरकिरी भी हुई है। इस बार तो मामला ही कुछ अलग दिखाई दे रहा है। ‘डूबते को तिनके का सहारा’ आज कल ये कहावत बिहार की राजनीति में चरितार्थ होती दिखाई दे रही है। लोक जनशक्ति पार्टी में टूट के बाद चिराग पासवान को जहां उनके अपने सहयोगी दलों ने अकेला छोड़ दिया वहीं तेजस्वी कुमार ने उनकी तरफ़ सहयोग का हाथ बढ़ाते हुए उन्हें छोटा भाई कहा है।

इतना ही नही लोजपा में हुए दो फाड़ के लिए भी तेजस्वी ने नीतीश कुमार पर आ’रोप लगाते हुए कहा है कि नीतीश कुमार बहुत पहले से ही लोजपा को तोड़ने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा कि चिराग पासवान को तय करना है कि वो संविधान बचाने वालों के साथ रहेंगे या गोलवरकर के साथ? उन्होंने तीसरे मोर्चे का भी ज़िक्र किया है।

साथ ही उन्होंने बताया कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की तबियत खराब है इन दिनों वो डॉक्टरों की देख रेख में हैं। नीतीश कुमार पर तंज कसते हुए कहा कि नीतीश कुमार को किसी बात की जानकारी नही रहती है। न तो उन्हें ये जानकारी है कि बिहार के कई जिलों में पेट्रोल 100 रुपये का हो गया है न उन्हें ये पता है कि पटना बेरोज़गारी का केंद्र बन गया है न उन्हें ये पता है कि बिहार में बाढ़ के पानी मे लोग डूब रहे हैं। इससे पहले भी पेट्रोल के बढ़े दाम को लेकर केंद्र व नीतीश सरकार पर निशाना साध चुके हैं।

उन्होंने कहा था कि ‘डबल इंजन सरकार के ट्रिपलिंग मल्टीपल नु’कसान हैं’ पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ रहे हैं सरकार कह रही है जनता पर अहसान कर रही है। पूंजीपतियों को फायदा पहुंचा रही है। उन्होंने एक ट्वीट के जरिये बिहार सरकार पर निशाना साधते हुए 20 जून को लिखा था कि बिहार सरकार की तीन करतूतें। 3 जून को सरकार ने स्वास्थ्य विभाग में फ़र्ज़ी तरीके से भर्ती बहाली की। 17 जून को रद्द की। 18 जून को फिर बहाल की और 19 जून को फिर रद्द कर दी। आप कल्पना कीजिये बिहार सरकार की निकम्मी सरकार युवाओं व प्रदेशवासियों के स्वास्थ्य, वर्तमान व भविष्य के साथ कैसे खिलवाड़ कर रही है।

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Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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