बिहार में कल एक बड़ा राजनीतिक बदलाव हुआ. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने NDA से नाता तोड़ लिया और और अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया. इसके बाद उन्होंने राजद नेताओं से मुलाक़ात की और महागठबंधन के साथ नए गठबंधन का एलान किया. बिहार की सियासत में कल का दिन बहुत तेज़ी का रहा, ऐसे में देश के बड़े-बड़े पत्रकार भी घटना को कवर करने के लिए पटना पहुँचे.

पटना पहुँची मीडिया की एक टीम को राजद कार्यकर्ताओं के ग़ुस्से का सामना करना पड़ा. राजद कार्यकर्ताओं ने मीडिया की इस टीम को ‘गोदी मीडिया’ बताया और जमकर नारेबाज़ी की. टीवी एंकर अंजना ओम कश्यप को ख़ासतौर से नारेबाज़ी का सामना करना पड़ा. राजद के समर्थकों ने ‘अंजना ओम कश्यप मुरादाबाद’ के नारे भी लगाए. असल में राजद और कई विपक्षी दल मानते हैं कि मीडिया का बड़ा समूह केंद्र सरकार के इशारे पर काम करता है. अंजना ओम कश्यप और उनकी प्रेस टीम को इसके पहले भी विरोध का सामना करना पड़ा है.

आम जनता में भी एक तबक़ा ऐसा है जो मानने लगा है कि मीडिया सरकार की ख़ामियों की न तो बात करता है और न ही सत्ताधारी भाजपा के नेताओं से कोई मुश्किल सवाल करता है. इस तरह की मीडिया को NDVT के वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने ‘गोदी मीडिया’ का नाम दिया था, इसके बाद से ही ऐसे मीडिया हाउसेस को लोग गोदी मीडिया कहने लगे.

कई जगह मीडिया पर एक तरफ़ा रिपोर्टिंग का आरोप लगा है जिसके बाद जनता भी इस तरह की मीडिया के विरोध में खड़ी होती नज़र आती है. मीडिया को लेकर विपक्षी दल क्या सोचते हैं ये कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के बयान से समझ सकते हैं. एक प्रेस वार्ता के दौरान जब राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि मीडिया को भी चाहिए कि वो भी सरकार के बुरे कामों की पोल खोलने में हिम्मत दिखाए. उनकी बात को बीच में टोकते हुए राहुल ने कहा कि मीडिया हिम्मत नहीं दिखाएगी.

By Arghwan Rabbhi

Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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