पश्चिम एशिया के मु’स्लिम देश ने अन्तरिक्ष में भेजा उपग्रह, लेकिन अभी भी..

तेहरान:वैज्ञानिक तरक्क़ी में पश्चिम एशिया के देश ईरान ने कई कार्य किए हैं. उसका अमरीका से बड़ा वि’वाद है और अमरीका ने कई तरह के प्रतिबन्ध ईरान पर लगा रखे हैं. बावजूद इसके ईरान पर किसी तरह का कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है. ईरान लगातार अपने उद्देशों की प्राप्ति के लिए आगे बढ़ रहा है. ईरान ने इतवार को एक उपग्रह को अन्तरिक्ष में प्रक्षेपित किया है.

ईरान ने रविवार (9 फरवरी) को एक उपग्रह को अंतरिक्ष में “सफलतापूर्वक” प्रक्षेपित किया लेकिन यह कक्षा तक नहीं पहुंच पाया। यह जानकारी सरकारी टेलीविजन ने रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता के हवाले से दी। ईरान का ये उपग्रह भले ही कक्षा तक न पहुँच पाया हो लेकिन इसका सफलतापूर्वक प्रक्षेपण भी एक वैज्ञानिक प्रोग्रेस की ओर इशारा करता है.

मंत्रालय की अंतरिक्ष इकाई के अहमद हुसैनी के हवाले से कहा गया, ”सिमोर्ग (रॉकेट) ने उपग्रह जफर को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया, लेकिन उपग्रह को कक्षा में स्थापित करने के लिए अपेक्षित गति हासिल नहीं कर सका।” वहीं दूसरी ओर,ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड की एयरोस्पेस डिवीजन ने मध्यम दूरी तक मार करने वाली मिसाइल का रविवार (9 फरवरी) को खुलासा किया है। सरकारी टेलीविजन ईरानी टीवी ने यह जानकारी दी है।

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के कमांडर मेजर जनरल होसैन सलामी ने आईआरजीसी एयरोस्पेस के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल अमीरली हाजीजादे के साथ मिसाइल और इंजन का अनावरण किया। फतेह श्रेणी और कम वजन वाली इस मिसाइल का नाम राड-500 (राड का मतलब गरज होता है) है और इसकी मारक क्षमता 500 से 700 किलोमीटर तक है। यह अपने लक्ष्य को बहुत ही सटीकता से भेदने में सक्षम है। इसके अलावा एक मिसाइल प्रणोदक का भी प्रदर्शन किया गया है, जिसका नाम सलमान है और यह मिसाइल में ठोस ईंधन के जरिए इसे निर्वात में भी काम करने के लिए सक्षम बनाता है।

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