नई दिल्ली: बंगाल में भाजपा की हार के बाद से ही सभी भाजपा विरोधी राजनैतिक दलों को केंद्र से भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए रास्ता दिखाई देने लगा है। इसी मनसूबे की पूर्ति के लिए राजनैतिक दलों ने अपने साथियों की तलाश करना शुरु कर दी है। शरद पवार और ममता बनर्जी जैसे नेताओं ने इसकी पहल अब शुरू कर दी है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि यदि लोकसभा चुनावों से पहले तीसरे मोर्चे का गठन होता है तो वो बीजेपी के विजयी रथ को कहां तक रोक पाता है।

पश्चिम बंगाल में ममता को तीसरी बार सत्ता पर काबिज करवाने वाले रणनीतिकार प्रशांत किशोर की मांग बंगाल चुनाव के बाद इन दिनों बहुत बढ़ गई है। एनसीपी प्रमुख शरद यादव के साथ प्रशांत किशोर इन दिनों कम अंतराल में ही दो बैठक कर चुके हैं। ऐसी खबर भी आ रही है कि एनसीपी प्रमुख चाहते हैं कि प्रशांत किशोर उनके साथ काम करें और एनसीपी को महाराष्ट्र में मज़बूत करें। कुछ जानकारों का यह भी कहना है कि शरद पवार और प्रशांत किशोर की मुलाकात तीसरे मोर्चे को गठित करने की तैयारी है।

हालांकि प्रशांत किशोर ने ये कहा है बीजेपी को ह’राने के लिए तीसरा मोर्चा कारगर नही होगा। शरद पवार से मीटिंग के सवाल पर उन्होंने कहा कि ये एक शिष्टाचार मुलाकात थी। इससे पहले भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रीय मंच के नेताओं ने कहा था कि शरद पावर के घर हुई तीसरे मोर्चे के गठन की कवायद नही है बल्कि समान विचारधारा के दलों को एक साथ लाने का प्रयास है।

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