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हमने नहीं की बुर्क़े को बैन करने की माँग: शिव सेना

उद्धव ठाकरे

मुंबई: शिव सेना ने बुर्क़े पर पाबंदी की बात को लेकर सामना में छपे एक एडिटोरियल से किनारा कर लिया है. शिव सेना ने इस बारे में एक बयान जारी कर कहा कि ये पार्टी का बयान नहीं है और एडिटोरियल लिखने वाले का अपना व्यक्तिगत बयान हो सकता है. शिव सेना के प्रवक्ता नीलम गोरहे ने इस बारे में एक बयान जारी कर कहा कि हर नीतिगत फ़ैसला नेताओं की मीटिंग के बाद लिया जाता है या उद्धव ठाकरे लेते हैं.

इस अरब देश के पास है दुनिया का सबसे ताक़तवर पासपोर्ट

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UAE

इसमें शायद ही कोई दो राय हो कि अरब के क्षेत्र में इतिहास से जुड़ी ऐसी बातें मिलती हैं कि जिन्हें कोई भी देखना चाहेगा। अक्सर मिस्र, ईराक़ और आस- पास के क्षेत्र में टूरिस्ट का आना-जाना रहा है लेकिन पिछले कुछ सालों में स्थिति ऐसी नहीं रही है। अमरीका द्वारा ईराक़ पर किए गए हम-ले के बाद से ही देश में अस्थिरता की स्थिति है। ईराक़ के अलावा सीरिया, यमन जैसे देशों में गृह यु’द्ध चल रहा है. शायद इसी वजह से अब कोई सीरिया, यमन और ईराक़ जैसे देशों में ट्रेवल नहीं करना चाहता।

सऊदी अरब में नहीं है कोई भी नदी, इस तरह किया जाता है पीने के पानी का इंतज़ाम

अरब क्षेत्र के सबसे महतवपूर्ण देशों में से एक सऊदी अरब की सबसे बड़ी समस्या ये है कि सऊदी अरब में पानी नहीं है. पीने के पानी की समस्या से जूझ रहे सऊदी अरब में सरकार इस ओर विशेष काम कर रही है. सरकार देश में कोई नदी न होने की वजह से इस कोशिश में है कि समंदर के पानी को पीने लायक़ बनाया जाए. ऐसा किया भी जा रहा है जिसमें काफी पैसा ख़र्च हो रहा है. इसको लेकर समझने की ज़रूरत ये भी है कि सऊदी अरब में तेल के बड़े-बड़े कुँए हैं लेकिन पानी के कुँए जो थे सब सूख गए हैं.

सऊदी अरब की इस परेशानी के बारे में बीबीसी ने एक रिपोर्ट छापी है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सन 2011 में सऊदी अरब के उस समय के पानी और बिजली मंत्री ने कहा था कि देश में पानी की माँग हर साल सात प्रतिशत की दर से बढ़ रही है. उन्होंने कहा था कि अगले एक दशक में इसके ऊपर 133 अरब डॉलर का ख़र्च आएगा. सऊदी अरब सालीन (खारा) वाटर कन्वर्जन कॉर्प (एसडब्ल्यूसीसी) हर रोज़ 30.36 लाख क्यूबिक मीटर समंदर के पानी को नमक से अलग कर इसे पीने लायक़ बनाता है. पानी की समस्या दिन ब दिन बढ़ रही है और ऐसे में सऊदी सरकार को इसके लिए विशेष क़दम उठाने ज़रूरी हैं.

बीबीसी ने कहा है कि कई रिसर्च मानती हैं कि सऊदी अरब में भूमिगत जल 11 साल में समाप्त हो जाएगा. सऊदी अरब में प्रति व्यक्ति पानी की खपत हर दिन 265 लीटर बतायी जाती है जोकि यूरोपीय यूनियन के देशों से दुगनी है. आपको बता दें कि सऊदी अरब में कोई भी नदी नहीं है और न ही कोई झील है. लम्बे समय से लोग यहाँ पानी के लिए कुओं पर निर्भर हैं. वक़्त के साथ पानी की ज़रूरत बढ़ी लेकिन कुओं का लेवल नीचे जाता गया. स्थिति यहाँ तक आ गयी कि अब कुँए सूखने लगे.

जनता पहचाने कौन असली चौकीदार: तेज बहादुर यादव

तेज बहादुर यादव

लखनऊ: समाजवादी पार्टी ने कल वाराणसी लोकसभा सीट से अपने उम्मीद’वार को बदल दिया है. अब पार्टी ने तेज बहादुर यादव को प्रत्याशी बनाया है. इसके पहले इस सीट से सपा ने शालिनी यादव को प्रत्याशी बनाया था. तेज बहादुर यादव पूर्व सैनिक हैं और उन्होंने सेना में सैनिकों को दिए जाने वाले खाने की क्वालिटी के बारे में आपत्ति जताई थी जिसके बाद उन पर अनुशासनात्मक कार्यवाही की गई थी और उन्हें सस्पेंड कर दिया गया.

बेगुसराय में चुनाव के बाद ये है रिपोर्ट, कन्हैया कुमार के लिए..

कन्हैया कुमार

बेगुसराय: ये ऐसी लोकसभा सीट है जो पिछले कुछ समय से काफ़ी चर्चा में है. इस बात की वजह ये है कि यहाँ से सीपीआई के टिकट पर कन्हैया कुमार चुनाव लड़ रहे हैं. कन्हैया की वजह से ही ये सीट लाइम-लाइट में है लेकिन ऐसा नहीं है कि कन्हैया के लिए यहाँ राह आसान है. यहाँ से राजद के तनवीर हसन और भाजपा के गिरिराज सिंह भी उम्मीदवार हैं. मीडिया में भले ही तनवीर हसन को बहुत कवरेज न दी जा रही हो लेकिन वो भी यहाँ मज़बूत उम्मीदवार माने जा रहे हैं.

गिरिराज सिंह के बारे में बात करें तो उनकी छवि एक कट्टरवादी नेता की रही है जो अपने अच्छे कामों के लिए नहीं बल्कि विवादित बयानों के लिए जाने जाते हैं. अब जबकि चुनावों में वोटिंग हो गई है तो कौन किस पोजीशन में है इसके लिए हमने क्षेत्रीय वोटरों से बात करके जायज़ा लेने की कोशिश की. हमें अभी तक जो ख़बरें मिल रही हैं उसके मुताबिक़ रूझान ये हैं कि यहाँ से तीनों प्रत्याशी अच्छे से लड़े हैं. कन्हैया कुमार का समर्थन भी ज़ोरदार देखने को मिला है वहीँ तनवीर भी कुछ इलाक़ों में अच्छे वोट पाए हैं.

गिरिराज सिंह की बात करें तो उनका चुनाव सिर्फ़ इस बात पर निर्भर करता है कि तनवीर और कन्हैया में कितना वोट बंट जाता है. अगर दोनों में से एक ही उम्मीदवार अधिक वोट पाता है तो गिरिराज के लिए स्थिति मुश्किल है लेकिन दोनों को लगभग बराबर वोट मिल जाए तो गिरिराज के लिए सफ़र आसान है. गिरिराज को लेकर हालाँकि बेगुसराय की जनता में कोई ख़ास उत्साह नहीं देखा गया है, वो भाजपा के परंपरागत वोट पर ही अधिक निर्भर नज़र आ रहे हैं.

भदोही: राष्ट्रीय पार्टी ने किया साफ़, समर्थन सिर्फ़ महागठबंधन को..

लखनऊ, 26 अप्रैल 2019  ।  राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रमेश दीक्षित ने आज जारी किये गए बयान में कहा कि भदोही लोकसभा सीट से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने किसी को भी सिम्बल देके मैदान में नहीं उतारा । 

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रमेश दीक्षित ने जारी एक बयान में कहा कि भदोही लोकसभा सीट से राकांपा ने किसी को भी मैदान में नहीं उतारा है । इसके साथ साथ उन्होंने कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा-लोकदल के महागटबंधन को बिना शर्त पूर्ण समर्थन का पहले ही ऐलान कर चुकी है । 

प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रमेश दीक्षित ने जारी बयान में आगे कहा कि इसके साथ साथ राकांपा ने अखिलेश कुमार द्विवेदी को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्काषित कर दिया है । इस बाबत जिलाधिकारी भदोही को भी एक पत्र प्रेषित किया जा चूका है । 

अनाथ सांडों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है, कल रैली में एक सांड अपना ज्ञापन देने घुस आया: अखिलेश यादव

कन्नौज: महागठबंधन की चुनावी रैली के हैलीपैड में उस समय भगदड़ का माहौल बन गया जब अचानक ही एक सांड कड़ी सुरक्षा के बीच हेलीपैड में घुस आया. सुरक्षाकर्मियों ने उसे क़ाबू में करने की कोशिश की लेकिन उसने वहाँ के कई कर्मियों को घायल कर दिया. दो सुरक्षाकर्मियों के घायल होने की पुष्टि की गई है. बाद में अखिलेश ने यहाँ जनसभा को संबोधित किया और उन्होंने कहा कि सांड को काबू करने के दौरान जो जवान जख्मी हुए हैं, उन्हें वह 23 मई को चुनाव के नतीजे आने के बाद इसी ग्राउंड पर सम्मानित करेंगे.

अखिलेश यादव ने इस घटना के बाद कहा,”‘विकास’ पूछ रहा है: आजकल आप देख रहे हैं कि नहीं कि किस तरह अनाथ सांडों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है? कल रैली में एक सांड अपना ज्ञापन देने घुस आया और भाजपा सरकार का गुस्सा बेचारे सिपाही पर निकाल डाला, जब उसे बताया कि ये उनको बेघर करने वालों की रैली नहीं है, तब जाकर वो शांत हुआ.”

भाजपा की रैलियों से कहाँ ग़ायब हैं विकास के मुद्दे?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह लगातार चुनावी रैली कर रहे हैं.इसके साथ ही दूसरे बड़े नेता भी रैली कर रहे हैं. भाजपा के छोटे-बड़े हर नेता की रैली में जो मुद्दा ज़ोर-शोर से सुनने को मिल रहा है वो है राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा. चुनाव आयोग ने हालाँकि नेताओं से कहा है कि वो सेना का इस्तेमाल अपनी राजनीति के लिए न करें लेकिन भाजपा नेता लगातार इसी मुद्दे पर चुनाव लड़ते नज़र आ रहे हैं. मोदी लगभग हर रैली में पुलवामा और बालाकोट का ज़िक्र कर रहे हैं और ये बताने की कोशिश कर रहे हैं कि सिर्फ़ उनकी पार्टी की सरकार ही भारत को सुरक्षित सीमाएँ दे सकती है.

परन्तु कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन पर भाजपा कोई चर्चा नहीं कर रही है. हालत तो ये है कि अगर भाजपा के किसी नेता से इस विषय पर सवाल कर दिया जाये तो वो बहस को छोड़ देता है. भाजपा २०१४ में जब सत्ता में आयी थी तब उसने कई वादे किए थे. इन वादों को लेकर विपक्ष दावा करता है कि पूरे नहीं हुए लेकिन हम आज उन कुछ कामों की बात करेंगे जो मोदी सरकार में हुए हैं और जब ये योजनाएँ आयी थीं तब भाजपा ने इन्हें क्रांतिकारी योजनाएँ बताया था.

नोटबंदी: 8 नवम्बर 2016 को अचानक ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की कि आधी रात के बाद से पुराने 500 और 1000 के नोट नहीं चलेंगे. इस नीति पर कई तरह के सवाल उठे, लोगों को कई क़िस्म की परेशानियाँ हुईं. बैंकों के बाहर लम्बी-लम्बी लाइन्स लगीं. इसमें 100 से अधिक लोगों की जान भी चली गई. परन्तु प्रधानमंत्री मोदी ने दावा किया कि 50 दिन में सब मुश्किल दूर हो जाएगी. दावा ये किया गया था कि नोटबंदी से कालाधन वापिस आ जाएगा, नोटबंदी से आतंकवाद की कमर टूट जाएगी. आँकड़ों की मानें तो 99.9% से भी अधिक नोट वापिस आ गये. इसका मतलब नक़ली नोटों की जो बात की जा रही थी वो उतने बड़े स्तर पर थे ही नहीं. आतंकवाद की कमर टूटने की बात तब सही मानी जाती जब उसके बाद कोई आतंकी हमला न होता लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ. यही वजह है कि भाजपा इस मुद्दे को चुनाव में लेकर नहीं जाना चाहती.

GST: ‘माल और सेवा कर’ जब लागू किया गया था तब भी इस तरह की बात की गई थी कि ये क्रांतिकारी बदलाव है और इसके लागू होते ही देश का व्यापार जगत ख़ुशी से झूम उठेगा लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. GST के जल्दबाज़ी में लागू किए जाने की वजह से कई छोटे व्यापार टूट गए. ऐसा नोटबंदी में भी हुआ था. व्यापारी वर्ग इस वजह से थोड़ा नाराज़ भी है.

नौकरी: २०१४ के चुनाव प्रचार में भाजपा ने ज़ोर-शोर से कहा था कि उनकी सरकार हर साल २ करोड़ युवाओं को नौकरी देगी लेकिन ऐसा भी नहीं हो सका. ऊपर से जो बेरोज़गारी के आंकड़े आए हैं वो चौंकाने वाले हैं. यही वजह है कि भाजपा इस मुद्दे पर भी कोई बहस नहीं चाहती.

भाजपा की किसी भी रैली में इन मुद्दों पर कोई बात नहीं कर रहा है. भाजपा के नेता पूरी तरह से चुनाव को राष्ट्रीय सुरक्षा पर केन्द्रित रखना चाहते हैं. वहीँ कांग्रेस समेत दूसरे विपक्षी दल सेना के शौर्य की तो तारीफ़ कर रहे हैं लेकिन भाजपा से ये सवाल कर रहे हैं कि आख़िर वो इन मुद्दों पर ख़ामोश क्यूँ है.

(अरग़वान रब्बही)

प्रियंका गांधी ने स्मृति ईरानी पर साधा निशाना,’कर रही हैं अमेठी की जनता का अपमान’

आज अमेठी में प्रियंका गांधी ने भाजपा प्रत्याशी स्मृति इरानी पर जम कर हमला बोला. कांग्रेस की नेत्री प्रियंका गांधी ने कहा,”ये स्मृति इरानी जी यहाँ आईं और उन्होंने जूते बांटे, ये कहने के लिए कि इनके पास जूते भी नहीं हैं पहनने के लिए. ये सोच रही हैं कि राहुल जी का अपमान कर रही हैं, ये कर रही हैं अमेठी की जनता का अपमान”.

भाजपा नेत्री की राहुल गांधी को लेकर आश्चर्यजनक टिपण्णी,’बम बांधकर…’

महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना सरकार में मंत्री और भाजपा नेत्री पंकजा मुंडे ने कल एक ऐसा बयान दे दिया है जिसके बाद विवाद हो गया है. सर्जिकल स्ट्राइक पर बात करते करते मुंडे कुछ ऐसा बोल गईं जिसके कारण वो विवादों में फंसती दिख रही हैं. उन्होंने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि कुछ लोग पूछ रहे सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में और कहते हैं सुबूत क्या है.

उन्होंने आगे कहा कि मैं कहती हूँ कि हमें एक बम राहुल गांधी के साथ बांध कर उन्हें दूसरे देश भेजना चाहिए था तब उन्हें पता चलता. लोकसभा चुनाव के दौरान विवादित बयानों की श्रेणी में ये बयान काफ़ी ऊँचे पायदान पर आ सकता है. इसके पहले भाजपा की भोपाल प्रत्याशी प्रज्ञा ठाकुर ने शहीद हेमंत करकरे के बारे में अपमानजनक टिपण्णी की थी. हालाँकि बाद में उन्होंने अपने शब्द वापिस ले लिए.

भाजपा के कई और नेता भी विवादित बयान दे चुके हैं. वहीँ अन्य दलों के नेताओं ने भी विवादित बयान दिए हैं लेकिन मुंडे का बयान शायद सभी बयानों को पीछे छोड़ता दिख रहा है.