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अपने बेटे की शादी में राज ठाकरे ने मोदी को नहीं दिया न्योता; राहुल, सोनिया, गडकरी को मिला न्योता…

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राज ठाकरे (फ़ाइल)

मुंबई: यूँ तो शादी एक व्यकतिगत मामला है और इसमें अक्सर दो परिवारों की ही बात होती है. परन्तु हमारे यहाँ कहा जाता है कि दोस्ती और दुश्मनी शादी ब्याह के ही मौक़ों पर पहचान में आती है. किसे बुलाया गया है और किसे देर में बुलाया गया है सब मायने रखता है. घर के अन्दर भी ये चर्चाएँ होती हैं कि किसको शादी में अधिक एहमियत देनी है. हम अभी जिस शादी की बात करने जा रहे हैं वो कोई आम शादी नहीं है. हम बात कर रहे हैं मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे के बेटे की शादी के बारे में.

सऊदी अरब में तीन भारतीयों की ह*त्या, दो थे सगे भाई..

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आज़मगढ़ : सऊदी अरब से मे रहने वाले भारतीयो के बारे मे एक दु’खद ख़बर सामने आ रही है । नौकरी करने वाले आजमगढ़ के दो सगे भाइयों सहित तीन लोगों की नि’र्मम ह^’त्या की दु’खद ख़बर सामने आयी है। ह’त्या का आरोप उनके मालिक( जिसके पास वह काम करते थे) पर ही लग रहे हैं ।तीनों का श*व रविवार को सऊदी अरब पुलिस ने बरा’मद कर लिया है। इसकी घटना की सूचना मिलते ही मृ”त^कों के घर मे मा’तम पसर गया है। मृ’त*कों के परिजनों ने अरब व्यापारी जिसके यहाँ ये लोग काम करते थे ,उन पर ही ह’त्या करने का आरोप लगाया है।

जानिए कौन है काजोल की सोशल मीडिया गुरु, उनका पेज भी कर चुकी हैं मैनेज..

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इंस्टाग्राम जैसे सोशल प्लेटफ़ॉर्म पर इन दिनों फ़िल्मी सितारे छाए हुए हैं। ये एक बेहतरीन ज़रिया है अपने फ़ैंज़ से अपनी लाइफ़ बाँटने का। इन्हीं सितारों में शामिल हैं क़रीब 70 लाख से ज़्यादा फ़ॉलोअर वाली काजोल भी। इंस्टा में एक्टिव रहने वाली काजोल का कहना है कि उन्हें इन चीज़ों की कोई जानकारी ही नहीं थी उन्हें तो इंस्टा मैनेज करना और उसकी बारिकियाँ उनकी बेटी न्यासा ने सिखाया है। यही नहीं काफ़ी दिनों तक तो न्यासा ही काजोल के पेज को मैनेज भी किया करती थी।

सपा-बसपा गठबंधन के बाद 6 मंत्रियों के लिए अपनी सीट बचाना हुआ मुश्किल, बुरी तरह हो सकती है इनकी हार..

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लखनऊ: आगामी लोकसभा चुनाव से ठीक मायावती और अखिलेश यादव के एक साथ आने का सीधा असर कहीं न कहीं केन्द्र की मोदी सरकार पर पड़ता नज़र आ रहा है।इस गठबंधन के कारण प्रधानमंत्री मोदी की कैबिनेट के करीब आधा दर्जन से ज्यादा मंत्रियों की वापसी की राह मुश्किल हो रही है।अनुमानो के अनुसार अगर इस बार भी जनता 2014 की तर्ज़ पर ही मतदान करती है तो कम से कम इन 6 केंद्रीय मंत्रियों की मुश्किलें इस चुनावी गठबंधन की वजह से बढ़ सकती हैं।

अगर आप भी चावल खाते हैं तो ज़रूर पढ़ें हुज़ूर(स.अ.व्.) का ये हुक़्म…

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फ़ोटो क्रेडिट: भारत दुनिया

अस्सलाम ओ अलैकुम दोस्तों, हम हर रोज़ आपके लिए दीन की बात लेकर आते हैं। दोस्तों, आज एक बार फिर हम हाज़िर हैं दीन की अहम बात लेकर। आज हम बात करने जा रहे हैं चावल के बारे में। जी, दोस्तों, हम सभी चावल का इस्तेमाल अपने खाने में करते हैं। कुछ लोग कम तो कुछ लोग अधिक चावल का सेवन करते हैं। कभी कभी ऐसा भी होता है कि किसी को बीमारी की वजह से परहेज़ करने के लिए कहा जाता है। चावल लेकिन लगभग हर घर में खाया जाता है। हम आज आपको बताने जा रहे हैं चावल के बारे में प्यारे नबी (स०अ०व०) के बयान के बारे में।

ये पाँच मुस्लिम देश हैं सबसे सुरक्षित, पहले नंबर वाला सबसे अमीर भी..

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किसी भी देश की खुशहाली और तरक्की उस देश के नागरिकों पर निर्भर होती है । अगर देश के नागरिक ख़ुशहाल हैं तो देश भी ख़ुशहाल होगा। नागरिकों की ख़ुशहाली नापने के पैमानों पर बात करें तो सबसे ऊपर प्रति व्यक्ति आय होगी। अगर नागरिकों के पास पैसा है तो उनकी बुनियादी ज़रुरते रोटी ,कपड़ा ,मकान पूरी होंगी। इसके अलावा सुरक्षा का वातावरण, सम्मान के साथ जीने की आज़ादी,शिक्षा, स्वास्थ्य, इंफ्रास्ट्रक्चर, सरकारी नीतियां।

सपा-बसपा गठबंधन से यादव उम्मीदवारों को मिलेगी मज़बूती, समाज के इतने सांसद…

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Akhilesh Yadav (Photo credit: Twitter)

उत्तर प्रदेश की सियासत पूरे देश के लिए मायने रखती है। सबसे अधिक आबादी वाले इस प्रदेश में 80 लोकसभा सीटें हैं। ऐसा कहा जाता है कि दिल्ली की सत्ता का रास्ता उत्तर प्रदेश से जाता है। ये बात ठीक भी है। अपने सबसे अच्छे समय में भी नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनने के लिए उत्तर प्रदेश से चुनाव लड़ना पड़ा। उत्तर प्रदेश की सियासत की बात करें तो यहाँ अलग अलग जातियों का अपना प्रभाव है।इन जातियों में यादव का भी अहम नाम आता है। यादव समाज की बात करें तो प्रदेश की सत्ता पर लंबे समय राज करने वाला इस समुदाय का आज भी प्रदेश की राजनीति पर मज़बूत प्रभाव है।

उत्तर प्रदेश में यादव आबादी तक़रीबन 11% है, ऐसे में यादव सांसदों की संख्या कम से कम 8 से 9 होनी चाहिए लेकिन अभी ऐसा नहीं होता। समाजवादी पार्टी को यादवों की पार्टी कहा जाता है, ऐसे में सपा ही सबसे अधिक यादव समाज के प्रत्याशी खड़े करती है। 16वीं लोकसभा की बात करें तो समाजवादी पार्टी के कुल 5 सांसद हैं और पाँचों सांसद ही यादव हैं। सभी मुलायम परिवार के सदस्य हैं। ‘मोदी लहर’ में भी भाजपा इन क़द्दावर यादव नेताओं को नहीं रोक सकी।

अब जबकि सपा-बसपा का गठबंधन हो गया है तो ऐसा लगता है कि यादव समाज को मुस्लिम और दलित समुदाय का साथ मिलेगा जिससे दूसरे यादव नेता भी चुनाव जीत सकेंगे। जानकार मानते हैं कि इस बार सपा 10 से अधिक यादव नेताओं को टिकट देगी।सूबे की 80 लोकसभा सीटों पर बसपा से गठबंधन के बाद 38 सीटें सपा को मिली हैं। इनमें वो 10 या उससे अधिक टिकट यादव समाज को दे सकती है जबकि बसपा भी कुछ यादव उम्मीदवार उतार सकती है।

ऐसे में अच्छी सिचुएशन रहने पर यादव बिरादरी की अच्छी रिप्रजेंटेशन इस बार लोकसभा में देखी जा सकेगी। आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में भाजपा ने 2014 लोकसभा चुनाव में यादव प्रत्याशियों को बहुत जगह नहीं दी थी। मोदी लहर पर जीती भाजपा से कोई भी यादव उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत सका था। अब जबकि सपा-बसपा की स्थिति मजबूत है तो माना जा रहा है कि यादव रिप्रजेंटेशन बढ़ेगा।

मुस्लिम ने समझदारी से किया वोट तो होगा भाजपा का सफ़ाया, UP में इतने मुस्लिम पहुंचेंगे संसद…

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उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा का गठबंधन हो गया है। इसके साथ ही सीटों का बंटवारा भी हो गया है। दोनों पार्टियां 38-38 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करेंगी जबकि 2 सीटें सहयोगियों के लिए छोड़ दी गई हैं। इसके अतिरिक्त दो सीटों पर प्रत्याशी नहीं उतारे जाएँगे। ये सीटें अमेठी और राय बरेली की हैं। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में 80 लोकसभा सीटें हैं। उत्तर प्रदेश में इस गठबंधन के बाद से ही चुनावी चर्चा शुरू है। यही चर्चा राज्य के तक़रीबन 20% मुस्लिम समुदाय में भी हो रही है। 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में यहाँ से एक भी मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत ज़का था।

2009 में यहाँ से 7 मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव जीते थे। हालाँकि आबादी के हिसाब से यहां तक़रीबन 16 मुस्लिम सांसद होने चाहिए। कुछ जानकार मानते हैं कि इस बार उत्तर प्रदेश में मुस्लिम सांसदों की संख्या बढ़ेगी। 2018 में कैराना में हुए उपचुनाव में मुस्लिम उम्मीदवार की विजय हुई थी जिसके बाद ये चर्चा होनी शुरू हो गई कि मुस्लिम समाज अगर समझदारी से वोट करता है तो वो भाजपा को हराने में मदद करेगा। 2019 के लोकसभा चुनाव में उम्मीद यही है कि सपा और बसपा उचित संख्या में मुस्लिम उम्मीदवारों को चुनाव लड़ाएंगे। वहीं कांग्रेस भी मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देगी जबकि भाजपा के लिए ये कहना मुश्किल है।

भाजपा की छवि मुस्लिम विरोधी मानी जाती है और उसका कारण भाजपा नेताओं को जब तब आने वाले बयान हैं। हालांकि एक वजह ये भी है कि भाजपा मुस्लिम उम्मीदवारों को चुनाव में टिकट नहीं देती। इस चुनाव में भी उत्तर प्रदेश से भाजपा किसी मुस्लिम उम्मीदवार को चुनाव में उतारेगी, ऐसा मुश्किल ही लग रहा है। परंतु इस महागठबंधन जैसे गठबंधन के बन जाने से भाजपा की स्थिति काफ़ी ख़राब हो गई है। वहीं समाजवादी पार्टी ऑक्ट बहुजन समाज पार्टी की स्थिति काफ़ी मज़बूत हो गई है। ये दोनों ही पार्टियाँ इस बार दलित, यादव और मुस्लिम समाज को अच्छी संख्या में टिकट देने वाली हैं।

जानकार मानते हैं कि इस बार मुस्लिम सांसदों की संख्या दस के पार जा सकती है जबकि बहुत अच्छी स्थिति में ये 15 के भी पार जा सकती है। हालाँकि अभी ये क्लियर नहीं है कि कितने मुस्लिम उम्मीदवार सपा-बसपा खड़े करने वाली है। इसमें एक बात ये भी समझने की है कि आल इंडिया मजलिस ए इत्तिहादुल मुस्लिमीन उत्तर प्रदेश में प्रत्याशी उतारती है या नहीं। असदउद्दीन ओवैसी की पार्टी अगर उत्तर प्रदेश में प्रत्याशी खड़े करती है तो वो सपा-बसपा का वोट ही काटेगी। फ़िलहाल जो उम्मीद है वो यही है कि इस बार मुस्लिम सांसदों की संख्या काफी बढ़ सकती हैं।

अब्बास अंसारी के बयान से भाजपा में ख़लबली; ‘महागठबंधन इनको औक़ात बताएगा, मोदी…’

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अब्बास अंसारी (फ़ाइल)

लोकसभा चुनाव में अभी भले तीन चार महीने बाक़ी हों लेकिन उत्तर प्रदेश में अब इसको लेकर पूरी गहमागहमी शुरू है. ये सब सपा-बसपा गठबंधन के बन जाने के बाद और तेज़ हो गया है. जहाँ पहले सर्वे आते थे तो भाजपा को मज़बूत दिखाया जाता था अब भाजपा काफ़ी कमज़ोर दिख रही है. सपा बसपा गठबंधन के नेता भी अब खुलकर बयान दे रहे हैं. बसपा नेता अब्बास अंसारी ने इस बीच एक बयान दिया है. उन्होंने अपना बयान देते हुए कहा कि जनता भाजपा की नीतियों से काफ़ी परेशान हैं.

भाजपा के साथ सपा-बसपा ने इन पार्टियों को भी फँसाया, निषाद पार्टी और राजभर के लिए हो सकती है जुगाड़

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Akhilesh Yadav- Mayawati

दिल्ली: उत्तर प्रदेश की सियासत इन दिनों उफ़ान पर है। पिछले कुछ समय से जारी सस्पेंस आज उस समय समाप्त हो गया जब बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी ने 25 साल बाद साथ आने की घोषणा कर दी। लखनऊ में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सपा प्रमुख अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती ने सीटों के बंटवारे पर से भी सस्पेंस खत्म कर दिया और घोषणा कर दी कि दोनों दल 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे।अमेठी और रायबरेली की सीटें कांग्रेस के लिए छोड़ने की बात कही गयी है ।बाक़ी 2 सीटें सहयोगी दलों के लिए छोड़ दी गयी हैं ।