लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों के नज़दीक आते ही सभी राजनैतिक दलों ने अपनी अपनी गोटियां सेट करनी शुरू कर दी हैं। सत्ताधारी बीजेपी जहाँ अपने रूठों को मना कर संगठन को मजबूत कर रही है। वहीं सपा ने ऐलान कर दिया है कि आगामी विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी बड़ी पार्टियों से दूरी बनाकर चलेगी। वहीं सुभसपा के नेता ओमप्रकाश राजभर छोटे राजनैतिक दलों को साथ लेकर एक मोर्चा बनाने में जुट गए हैं।

कांग्रेस भी अकेले मैदान में ताल ठोंकने की तैयारी शुरू कर दी है। वहीं 2007 में सूबे में अपने दम पर पहली बार सत्ता हासिल करने वाली बसपा ने अभी पूरी तरह से अपने पत्ते नही खोलें हैं। कुछ समय से ऐसी अ’फवाहों ने जरूर ज़ोर पकड़ा था कि बसपा ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के साथ गठजोड़ करने के लिए हामी भर दी है.

इन अफवाहों से तं’ग आकर बसपा सुप्रीमो मायावती ने रविवार को एक बयान जारी कर इन खबरों का खं’डन किया हैं। अपने बयान में मायावती ने कहा है कि बसपा आगामी विधानसभा चुनावों में पंजाब को छोड़कर उत्तराखंड व उत्तरप्रदेश में अकेले अपने दम पर लड़ेगी। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के साथ चल रही गठबंधन की खबरों को आ’धारहीन बताते हुए इन खबरों को अ’फ़वाह करार दिया है।

इस तरह की म’नगढ़ंत और भ्र’मीत करने वाली खबरों पर नकेल कसने के लिए बसपा के राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा सांसद सतीश चन्द्र मिश्रा को बसपा की मीडिया सेल का राष्ट्रीय कॉर्डिनेटर बनाया गया है। उन्होंने मीडिया से अपील की है कि पार्टी व पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से संबंधित ऐसी किसी भी भ्र’मित और म’नगढ़ंत खबरों के बारे में सही जानकारी के लिए बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा से सम्पर्क कर लें।

गौरतलब है कि कभी उत्तर प्रदेश में दलित वंचित तबकों की पार्टी माने जाने वाली बसपा पिछले 10 सालों से उत्तर प्रदेश की सत्ता से बाहर चल रही है। 2007 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के बाद से बसपा में लगातार गिरावट जारी है। बसपा के कोर मतदाताओं में भी बीजेपी,सपा ने सेंध लगाकर काफी नु’कसान पहुंचाया है।ऐसे में ये देखना है कि आगामी चुनावों में बसपा अपने राजनैतिक किले को बचा पाने में कितना सफल हो पाती है।

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