ओवैसी के कथित भड़काऊ बयान को लेकर अदालत ने सुनाया फ़ैसला, 10 साल पुराने..

नमस्कार, भारत दुनिया में आप सभी का स्वागत है. हमने तय किया है कि हम हर रोज़ शाम को आपको दिन भर की ख़बरों की जानकारी देंगे. तो चलिए बात करते हैं आज की बड़ी ख़बरों की.

AIMIM के अध्यक्ष और हैदराबाद के सांसद असद उद्दीन ओवैसी के भाई अकबर उद्दीन ओवैसी को आज बड़ी राहत मिली. MP/MLA अदालत की नामपल्ली मेट्रोपोलिटन सेशन कोर्ट ने उन्हें भड़काऊ भाषण के दो मामलों में बरी कर दिया. सुबूतों के आभाव में अदालत ने ये फ़ैसला सुनाया. इसके साथ ही अदालत ने अकबर उद्दीन ओवैसी को आदेश दिया कि आगे कभी भी विवादित बयान न दें.

अकबर ने दिसम्बर 2012 में दो बयान दिए थे जो विवादों में आ गए थे. उन्होंने ये बयान निज़ामाबाद और निर्मल में दिए थे. अकबर ख़ुद तेलंगाना से विधायक हैं और पार्टी के बड़े नेता माने जाते हैं. आपको बता दें कि AIMIM ने पिछले सालों में अपनी पकड़ देश के अन्य राज्यों तक भी फैलाई है. पहले AIMIM का दायरा तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद तक ही सीमित माना जाता था लेकिन अब पार्टी के विधायक महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों में भी हैं. साथ ही AIMIM ने महाराष्ट्र की एक सीट पर भी लोकसभा चुनाव जीता.
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी सरकार की तारीफ़ करते हुए कहा कि प्रदेश में हिन्दू और मुस्लिम के दो बड़े त्यौहार एक ही साथ पड़े लेकिन किसी तरह की कोई अप्रिय घटना उत्तर प्रदेश में सुनने को नहीं मिली. उन्होंने अन्य राज्यों में हुई हिंसा की ओर इशारा करते हुए कहा कि बाकी कई राज्यों में कुछ भी हुआ हो, लेकिन उत्तर प्रदेश के एक भी जिले से इस तरह की कोई खबर सामने नहीं आई है। बता दें कि योगी आदित्यनाथ ने इस बयान का वीडियो अपने ट्विटर हैंडल से शेयर किया था। उन्होंने इस बयान के चलते राज्य में शांति कायम रखने की कोशिश की है।

इस बयान में उन्होंने कहा है कि “यूपी में 25 करोड़ की आबादी रहती है। 800 स्थानों पर रामनवमी की शोभायात्रा को लेकर जुलूस निकाले गए। साथ-साथ इस समय रमज़ान का महीना भी चल रहा है। कहीं भी तू-तू, मैं-मैं नहीं हुई। दं’गा फ़साद की बात तो दूर है। ये उत्तर प्रदेश के विकास की नई सोच को प्रदर्शित कर रहा है। यहां दंगा फसाद के लिए कोई जगह नहीं है। अराजकता, गुंडागर्दी और अफवाह के लिए कोई जगह नहीं है।”

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उत्तर प्रदेश में सियासी बयानबाज़ियों का दौर तो चल ही रहा है. हालाँकि कभी कभी कुछ ऐसा बयान आ जाता है जिसको लेकर चर्चाएँ बढ़ जाती हैं. कुछ इसी तरह का बयान आज़म ख़ान के मीडिया प्रभारी की ओर से दिया गया. अब इस बयान की चर्चा दो दिन तो हो गई लेकिन अब कुछ नहीं हो रही है.

उसकी वजह ये है कि प्रभारी के बयान को आधार मानकर AIMIM जैसी पार्टियों ने आज़म खान से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ. बल्कि AIMIM की ओर से जो भी सिग्नल मिले उस पर आज़म ख़ान के परिवार ने ध्यान भी नहीं दिया. वहीं बसपा और कांग्रेस को भी एहसास हो गया है कि इस मामले में कुछ होने वाला नहीं है.

आपको बता दें कि आज़म खान के मीडिया प्रभारी ने सपा के ख़िलाफ़ कुछ बातें कही थीं जिसके बाद AIMIM की ओर से बयान आया कि आज़म सपा छोड़ दें और AIMIM में आ जाएँ. मुस्लिम राजनीति का दावा करने वाली AIMIM के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शौक़त अली ने तो यहाँ तक कह दिया कि आज़म ख़ान सपा छोड़कर हमारी पार्टी में आ जाएँ और प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी सम्भालें.

आज़म ख़ान के मीडिया प्रभारी फ़साहत अली ख़ान ने एक बयान दिया जिसमें उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव, आज़म ख़ान का नाम तक नहीं लेते हैं. उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ये बात सही है कि अखिलेश नहीं चाहते कि आज़म जेल से बाहर आएँ. फ़साहत ने बात आगे बढ़ाई और कह दिया कि अब हम चाहते हैं कि आज़म साहब सपा छोड़ दें क्यूँकि सपा ने उन्हें नेता प्रतिपक्ष नहीं बनाया.

आपको बता दें कि फ़साहत के बयान के बाद समाजवादी पार्टी ने आज़म खान के परिवार से पूरे मामले को समझने की कोशिश की है. ख़बरों के मुताबिक आज़म परिवार ने सपा से नाराज़गी न होने की बात कही है. वहीं दूसरी ओर ऐसी भी ख़बरें हैं कि अब सपा आज़म ख़ान को जेल से बाहर लाने के लिए और कोशिशें करेगी. इस सिलसिले में क़ानूनी जानकारों से राय भी ली जा रही है.

अखिलेश यादव के क़रीबी सूत्रों का दावा है कि ऐसा संभव है कि लोकसभा चुनाव से पहले सपा आज़म ख़ान को नेता प्रतिपक्ष बना दे. असल में पार्टी के अन्दर मुस्लिम नेता ही नहीं बल्कि यादव नेता भी चाहते हैं कि पार्टी को आज़म या शिवपाल जैसी कार्यशैली की ज़रूरत है. ऐसे में सम्भव है कि आज़म ख़ान को पार्टी नेता प्रतिपक्ष बनाए.

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उत्तर प्रदेश में एमएलसी चुनाव के नतीजे आ चुके हैं. इन चुनावों में भाजपा ने पूरी तरह सपा का सफ़ाया कर दिया. हालाँकि सपा ये कह रही है कि एमएलसी चुनाव में उनके नेताओं को भाजपा ने प्रचार भी नहीं करने दिया और साथ ही पैसे और सत्ता के बल पर ही चुनाव पूरा सम्पन्न हुआ. सपा जहाँ चिंतित है वहीं सपा के देवरिया-कुशीनगर प्रत्याशी डॉक्टर कफ़ील को अपनी हार का ख़ास ग़म नहीं है.

उन्होंने अपनी हार के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया और कहा कि भाजपा प्रत्याशी कहा करते थे कि उन्हें 800 वोट नहीं मिलेंगे लेकिन मुझे 1031 वोट मिल गए. उन्होंने उन सभी लोगों का धन्यवाद किया जिन्होंने उन्हें वोट दिया. आपको बता दें कि देवरिया-कुशीनगर एमएलसी सीट पर सपा ने डॉ कफील खान को प्रत्याशी बनाया था लेकिन भाजपा के उम्मीदवार के सामने कफील ख़ास मुक़ाबला नहीं कर सके.

भारतीय जनता पार्टी ने यहाँ डॉक्टर रतनपाल सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया था। समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार डॉ कफील खान को इस चुनाव में मात्र 1031 वोट मिले। वहीं भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी डॉक्टर रतनपाल सिंह को 4255 वोट मिले उन्होंने डॉ कफील को 3224 मतो से शिकस्त दी।

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Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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