ओवैसी के इस बयान से उड़ी सपा, बसपा की नींद…

हैदराबाद: 2022 के चुनावों को देखते हुए उत्तर प्रदेश की राजनीति इन दिनों दिन दोगुनी, रात चौगुनी रफ़्तार से बढ़ रही है। सुबह कोई दल किसी के साथ लंच करता है तो रात में किसी और दल के साथ डिनर। जैसे जैसे विधानसभा सूबे के चुनाव नज़दीक आ रहे हैं वैसे वैसे राजनैतिक दल अपने राजनैतिक सहयोगी दलों की खोज में दिन रात एक कर दिए हैं। सत्ताधारी दल भाजपा जहाँ छोटी पिछड़ी व दलित जातियों को अपने साथ जोड़ने के लिए उन जातियों के नेताओं को अब संगठन में मुख्य ज़िम्मेदारी दे रही है। वहीं मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी सूबे के छोटे दलों को साथ लाने की फिराक में है। तो वहीं बसपा कांग्रेस ने अकेले दम पर चुनाव ल’ड़ने की तैयारी शुरू कर दी है।

ऐसे में अगर बात की जाए सूबे के अन्य छोटे दलों की तो पूर्व मंत्री,सुभसपा के अध्यक्ष व भागीदारी मोर्चा के संयोजक ओमप्रकाश राजभर के नेतृत्व में छोटे दलों को साथ लेकर एक अन्य मोर्चा भी भाजपा को टक्कर देने के लिए मैदान में उतर रहा है। इन दलों में सुभसपा, आप, एआईएमआईएम, प्रसपा, बाबूलाल कुशवाहा समेत कई राजनैतिक दल एक साथ जुगलबंदी करते नज़र आ रहे हैं। इस मोर्चे के गठन की कवायदों के बीच ही एआईएमआईएम के मुखिया ओवैसी ने ट्वीट करके यह बताता है पार्टी की की मीटिंग में तय हुआ है कि पार्टी सूबे100 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। प्रत्याशियों को ढूढने का काम चल रहा है, इसके लिए पार्टी में आवेदन फॉर्म जारी कर दिए हैं।

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि एआईएमआईएम भागीदारी संकल्प मोर्चा के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी।
ओवैसी की इस घोषणा के बाद से सबसे ज्यादा नुकसान समाजवादी पार्टी को उठाना पड़ सकता है। एआईएमआईएम का प्रभाव प्रदेश में कुछ खास नही है।लेकिन फिर भी समाजवादी पार्टी के मुस्लिम वोट में सें’धमारी कर के बड़ा नु’कसान पहुंचा सकती है। बिहार इसका उदाहरण है जहां पर सीमांचल में ओवैसी की पार्टी ने आरजेडी को काफी नु’कसान पहुंचाया था। ऐसे में माना जा रहा है कि ओवैसी की इस घोषणा से सपा भले ही मु’श्किल में हो लेकिन बीजेपी अंदर ही अंदर काफी खुश हो रही होगी।

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Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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