NPR पर भी झु’की मोदी सरकार, अमित शाह ने CAA को लेकर भी दिया..

नई दिल्ली: केंद्र सरकार जिस तरह से CAA लेकर आयी थी और जिस उत्साह से NRC की बात कर रही थी अब उतना ज़ोर नहीं दिख रहा है. अब ये लग रहा है कि केंद्र सरकार दबाव में है और अपने पहले के बयानों से पलटने की कोशिश में है.कल संसद में केन्द्रीय मंत्री अमित शाह ने एनपीआर के विषय में सरकार का पक्ष रखा. जिस तरह से उन्होंने बात रखी है उससे लगता है कि केंद्र सरकार दबा’व में है और चाहती है कि CAA और NRC के ख़ि’लाफ़ चल रहा आन्दो’लन ख़त्म हो.

उन्होंने कहा कि एनपीआर में कोई दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा. उन्होंने कहा कि लोगों के पास जो जानकारी नहीं है, उसे देने की कोई जरूरत नहीं है. गृहमंत्री ने कहा कि किसी को भी एनपीआर की प्रकिया से डरने की जरूरत नहीं है. राज्यसभा में दिल्ली हिं’सा को लेकर हो रही चर्चा का जबाव देते हुए गृहमंत्री ये बातें कहीं. इसके साथ ही अमित शाह ने कहा, ”बहुत दु:ख के साथ मैं कहना चाहता हूं कि पूरे देश में नागिरकता कानून को लेकर मुसलमान भाइयों-बहनों के मन में एक भय बैठाया गया कि आपकी नागरिकता सीएए से छीन ली जाएगी. ये गलत अफवाहें फैलाई जा रही हैं. सीएए, नागरिकता लेने का कानून है ही नहीं, ये नागरिकता देने का कानून है.”

दिल्ली हिं’सा को लेकर अमित शाह ने कहा, ”दंगों के उपरांत अब तक 700 एफआईआर दर्ज की गई है और जिसने भी एफआईआर दर्ज करवाई है, उसे रजिस्टर करने से पुलिस ने कहीं भी ना नहीं की है. 25 फरवरी की सुबह से ही दिल्ली के हर थाने में शांति समितियों की बैठक बुलाना शुरू कर दी गई थी. 26 फरवरी तक 321 अमन समितियों की बैठक बुलाकर हमने सभी संप्रदाय के धर्म गुरुओं से, दंगे न फैले इसके लिए उनसे अपने प्रभाव का प्रयोग करने की विनती की थी. दिल्ली दंगों के सिलसिले में अब तक 2600 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया.”

गृहमंत्री ने राज्यसभा में बताया, ”दिल्ली में कई सारी घटनाओं में से निजी हथियार चलने की भी घटना आई है. ऐसे 49 मामले दर्ज किए गए हैं और 52 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. दंगों में जो हथियार उपयोग हुए थें उनमें से लगभग सवा सौ हथियार जब्त कर लिए गए हैं. जिनकी पहचान हो चुकी है, उनकी सारी डिटेल हमारे पास उपलब्ध हो चुकी हैं. ऐसे लोगों को पकड़ने के लिए 40 से अधिक स्पेशल टीम का गठन किया है जो रात-दिन गिरफ्तार करने का काम कर रही हैं. कुछ सोशल मीडिया अकाउंट ऐसे थे, जो दंगों से दो दिन पहले शुरू हुए थे और 25 फरवरी की रात 12 बजे से पहले ही बंद हो गए और उन पर केवल दं’गा, न’फरत और घृ’णा फ़ैलाने का काम किया गया है.”

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Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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