नई दिल्ली. नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2019 को लेकर विवाद ज़ोरों पर है. जहाँ एक ओर भाजपा और केंद्र सरकार दावा कर रही है कि इससे देश का हर नागरिक ख़ुश है वहीँ इस विधेयक को लेकर नार्थ-ईस्ट में भारी विरोध है. विरोध इस तरह का है कि सरकार को कई इलाक़ों में कर्फ्यू लगाना पड़ा है.असम और त्रिपुरा के क्षेत्रों में रेल सेवायें बाधित हैं, इस ओर जाने वाली ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं. कई जगह भाजपा नेताओं को भी जनता के ग़ुस्से का सामना करना पड़ा है.

न्यूज़ एजेंसी PTI के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल के डिब्रूगढ़ स्थित घर पर पथराव किया. इसके अलावा असम के ही दुलियाजन में प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय मंत्री रामेश्वर तेली के घर पर हमला किया. देर रात हालात बिगड़ने पर गुवाहाटी और जोरहाट में सेना को बुला लिया है. वहीं, त्रिपुरा में असम राइफल्स के जवानों को तैनात किया गया है.

वहीँ इस बिल को लेकर विपक्ष पूरी तरह से एक नज़र आ रहा है. राज्यसभा में भले ही ये बिल पास हो गया लेकिन 105 सदस्यों ने इसके विरुद्ध भी वोट किया. ये आँकड़ा लोकसभा के आँकड़े से बहुत बेहतर बताया जा रहा है. वहीँ अब इसके ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है.इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के 4 सांसदों ने इस बिल के खिलाफ याचिका दाखिल की.

इंडियन याचिका में कहा गया है कि भारत का संविधान धर्म के आधार पर वर्गीकरण की इजाज़त नहीं देता है. ऐसे में नागरिकता संशोधन बिल असं’वैधानिक है. ये बिल संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत ट्वीन टेस्ट पर खरा नहीं उतरता है. कांग्रेस नेता और सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल मुस्लिम लीग की ओर से सुप्रीम कोर्ट में इस केस की पैरवी करेंगे.

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