नीतीश कुमार ने भाजपा के सामने रखी शर्त, भाजपा फ़ैसला करे कि..

November 12, 2020 by No Comments

बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद NDA सरकार बनाने की तैयारी में है लेकिन घटक दल जदयू ने अब अपना दबाव बनाना शुरू कर दिया है. जदयू के नेताओं को मालूम है कि उनके पास महागठबंधन से भी ऑफर है और ऐसे में वो भाजपा से अच्छी तरह बार्गेन कर सकते हैं. भाजपा NDA की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है वहीं जदयू को इस चुनाव में उम्मीद से काफ़ी कम सीटें मिली हैं. भाजपा नीतीश कुमार को एक बार फिर CM बनाने को तैयार है लेकिन नीतीश नहीं चाहते हैं कि वो दबाव में काम करें.

यही वजह है कि नीतीश कुमार ने अपनी ओर से गेम खेलना शुरू कर दिया है. नीतीश कुमार की ओर से भाजपा को कह दिया गया है कि उसे लोजपा के ऊपर फ़ैसला लेना होगा. जदयू मानती है कि उनकी कम सीटों का बड़ा कारण चिराग़ पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी है. ऐसे में नीतीश चाहते हैं कि भाजपा अपने सभी सम्बन्ध लोजपा से तोड़े और उस पर एक क्लियर कट राय बनाये. नीतीश कुमार ने आज इस मुद्दे पर कहा कि बीजेपी को उन लोगों के भविष्‍य के बारे में फैसला करना चाहिए जो वोट काटने का काम करते हैं.

जब उनसे ये सवाल हुआ कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा तो उन्होंने कहा कि इस विषय में NDA अपना फ़ैसला लेगा. इस बीच ख़बर आ रही है कि राजद ने विकासशील इंसान पार्टी और हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा से संपर्क साधा है और दोनों को उनके पाले में आने पर डिप्टी मुख्यमंत्री का पद दिए जाने का आश्वासन दिया है. सूत्रों से मिली ख़बर के मुताबिक़ ये दोनों ही दल NDA की ओर से क्या ऑफर आता है उसकी प्रतीक्षा में हैं. बिहार में नतीजे इस प्रकार रहे हैं- NDA- भाजपा ने 74 सीटों पर, जेडीयू 43 सीटों पर, विकासशील इंसान पार्टी (VIP) ने चार सीटों पर और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) ने 4 सीटों पर जीत दर्ज की है.

दूसरी तरफ विपक्षी महागठबंधन में शामिल आरजेडी (RJD) ने 75 सीटों पर, कांग्रेस (Congress) ने 19 सीटों पर, भाकपा माले (CPI ML) ने 12 सीटों पर, भाकपा (CPI) एवं माकपा (CPM) ने दो-दो सीटों पर जीत हासिल की है. इस चुनाव में एआईएमआईएम (AIMIM) ने 5 सीटें, लोजपा (LJP) एवं बसपा (BSP) ने एक-एक सीट जीती है. एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार जीतने में सफल रहा है.चुनाव में चिराग की पार्टी एलजेपी को केवल एक सीट हासिल हुई है. हालाँकि NDA का गठबंधन चुनाव से पहले का है लेकिन इसकी छोटी पार्टियां अपने फ़ायदे तलाशने की कोशिश में हैं.

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