तेल-अवीव: इजराइली चुनाव में प्रचार के दौरान लिकुद पार्टी ने लगातार ऐसे मुद्दे उठाए थे जिन्हें विवादित कहा जा सकता है. परन्तु सबसे विवादित दो बयान अंत में आये और वो लिकुद पार्टी के नेता और मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू की ओर से आये. एक बयान में नेतान्याहू ने कहा कि अगर उनका दल फिर सत्ता में आया तो जॉर्डन वैली को इजराइल में शामिल कर लेगा.

एक अन्य बयान उनके सोशल मीडिया प्रोफाइल से जारी हुआ जिसमें उन्होंने अरब समाज को लेकर आपत्तिजनक टिपण्णी की. हालाँकि बाद में नेतान्याहू ने इसका खंडन किया वहीँ इस बयान की वजह से फ़ेसबुक ने इन पर कुछ पाबंदी भी लगा दी जिसकी समय-सीमा 24 घंटे थी. लिकुद पार्टी ने इन दोनों ही बयानों को अपने समर्थकों के बीच बार-बार कहा जिससे कि उन्हें दक्षिणपंथी वोट बड़ी तादाद में मिलें.

सभी तिकड़म लेकिन फ़ेल होते नज़र आ रहे हैं क्यूंकि इजराइल में चुनाव के बाद जो जो रूझान आ रहे हैं उससे ऐसा लगता है कि लिकुद पार्टी सत्ता से दूर रहने वाली है. अनाधिकारिक नतीजों के मुताबिक़ लिकुद पार्टी को 32 सीटें मिल रही हैं जबकि इतनी ही सीटें ‘नीला और सफ़ेद’ पार्टी को भी मिली हैं. ‘जॉइंट लिस्ट’ को 12 सीटें मिली हैं और शास् को 9 सीटें तथा यिसरैल बेय्तेनु को भी 9 सीटें मिली हैं. इसके अतिरिक्त यूनाइटेड तोरा को 8, यमिना को 7 , लेबर-गशेर को 6, डेमोक्रेटिक कैम्प को 5 सीटें मिली हैं.

लिकुद और बाक़ी सभी दक्षिण पंथी दलों को मिला लिया जाए तब भी कुल सीटें 56 हो रही हैं जबकि 120 सीटों वाली क्नेस्सेट में बहुमत के लिए 61 सीटों की आवश्यकता है. दूसरी सेंटर-लेफ़्ट समूह के पास 55 सीटें आ रही हैं और लिबेर्मन के पास 9. रास्ता अभी साफ़ कुछ नज़र नहीं आ रहा है लेकिन जानकार मानते हैं कि नेतान्याहू शायद ही प्रधानमंत्री चुने जाएँ.

आपको बता दें कि नेतान्याहू के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं. उनके सत्ता से बाहर होते ही ऐसा माना जा रहा है कि उन पर भ्रष्टाचार के केसेस में कार्यवाई होगी. ‘नीला और सफ़ेद’ पार्टी पहले ही ये कह चुकी है कि वो लिकुद पार्टी से तभी कोई बातचीत करेगी जब नेतान्याहू पार्टी के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नहीं रहेंगे.

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