नौ साल के बच्चे ने माँ’गा माँ से चा’कू, कहा “मा’रना चाहता हूँ…”

इन दिनों हर इंसान की ज़िंदगी में टें’शन और डिप्रे’शन ने अपनी जगह बना ली है और इसके चलते लोग किसी भी तरह का क़द’म उठाने लगे हैं। वहीं इसी तरह का एक मु’द्दा है रै’गिंग भी। पहले रै’गिंग और डिप्रे’शन बड़े लोगों की बातें हुआ करती थीं लेकिन अब ये सिर्फ़ बड़ों तक सी’मित नहीं रहा बल्कि बच्चे भी इसका शि’कार होने लगे हैं। इसका एक ताज़ा उदाहर’ण हैं एक ऐसा विडीओ जो वाय’रल हो रहा है। ये विडीओ ऐसा है जो चौं’काने वाला है।

इस विडीओ में एक 9 साल का बच्चा ख़ुद को मा’रने की बात करता है। जी हाँ, ये विडीओ किसी और ने नहीं बल्कि ख़ुद उस बच्चे की माँ ने बनाया है और वो अपने बच्चे के इस हा’ल से बहुत परे’शान हैं। ये विडीओ आस्ट्रेलिया की एक महिला ने पोस्ट किया है जिसका नाम है यारका बेयल्स, जिनके बेटे क्वाडेन के छो’टे कद को लेकर स्कूली बच्चों ने लगातार इस तरह फ़’ब्तियाँ कसी कि आ’ख़िर इस बच्चे ने तं’ग आकर खुद को मा’र डा’लने की बात कह डाली। यारका बेयल्स ने ये विडीओ पोस्ट किया और लोगों का ध्यान इस ज्व’लंत मु’द्दे की ओर ले गयीं।


प्रतीकात्मक तस्वीर

इस विडीओ में उनका बच्चा रोते-रोते खु’द को मा’रने की बात कहता है। यारका बेयल्स ने जब अपने बेटे को स्कूल से पिक किया तो उन्होंने अपने बेटे को बहुत ह’ताश और निरा’श देखा। अचानक उस बच्चे ने जो अपने स्कूल की ड्रेस में है और कार की सीट पर नि’राश होकर झु’कता हुआ दिखाई दे रहा है, ग़ु’स्से में आकर कहता है “मुझे एक रस्सी दो, मैं खुद को मा’रने जा रहा हूँ”

इस विडीओ में पूरी घ’टना को ब’यान करते हुए यारका बेयल्स कहती हैं कि “मैंने अभी-अभी अपने बेटे को स्कूल से पिक किया है, जहाँ एक परे’शान करने वाली घ’टना मैंने देखी। इस बात पर मैंने प्रिंसिपल को बुलवाया और मैं चाहती हूं कि लोग, माता-पिता, शिक्षक इसके बारे में जानें कि स’ताने और परे’शान करने का कितना प्र’भाव पड़ता है।” इस विडीओ में क्वाडन इस क़द’र परे’शान और आह’त नज़र आता है कि वो कहता है “मैं अपने दिल में छु’रा घों’पना चाहता हूँ। मैं चाहता हूं कि कोई मुझे मा’र डाले”


क्वाडन
इस बात को सुनकर क्वाडेन की माँ बताती हैं कि “मैंने देखा एक छात्र को क्वाडेन के सिर पर थपथपाते हुए उसके छोटे क़द का म’ज़ाक़ बना रहा था। वह रोते हुए अपनी कार की ओर भागा क्योंकि वह नहीं चाहता था कि स्कूल में किसी तरह की बात बढ़े। मुझे लगता है कि मैं एक अभिभावक के रूप में असफल हो रही हूँ और मुझे लगता है कि शिक्षा प्रणाली वि’फल हो रही है।” ये मामला भले ही विदेश का हो लेकिन यहाँ उठने वाला स’वाल ऐसा है जिस पर सभी को ध्यान देना ज़रूरी है क्योंकि आए दिन हम भी बच्चों की आ’त्मह’त्या के मामले से रूबरू होते रहते हैं।

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Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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