नागरिकता संशोधन विधेयक के ख़िला’फ़ शिवसेना ने भी बु’लंद की आवाज़, ‘अब समर्थन नहीं…’

December 10, 2019 by No Comments

महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से पहले की तस्वीर, जिसमें शिवसेना और बीजेपी एक ही सिक्के के दो पहलू की तरह नज़र आते थे। विधानसभा चुनाव को एक साथ एक गठबंधन के रूप में लड़े थे।विधानसभा चुनाव के परिणामों के आने के बाद, महाराष्ट्र में जो सरकार बनी, उसने सारे समीकरण और सारे पहलू सिर के बल उलट दिए। शिवसेना और बीजेपी जिन्हें सिक्के के दो पहलू समझा जाता था, उसी शिवसेना ने अब बीजेपी से दो टूक शब्दों में कह दिया है कि जब तक उनके सवालों के जवाब नहीं मिल जाते, तब तक वह नागरिकता संशोधन बिल पर सरकार का समर्थन नहीं करेंगे।

आपको बता दें कि शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र आघाड़ी विकास पार्टी के गठबंधन का नेतृत्व कर रहे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने केंद्र की सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार से साफ कर दिया है कि, वह नागरिकता संशोधन बिल पर आगे तब तक सरकार का समर्थन नहीं करेंगे, जब तक उनके सवालों के जवाब नहीं मिल जाते। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का कहना था कि, जो कोई असहमत होता है, वह देशद्रो’ही होता है, यह बीजेपी का भ्रम है। यह भ्रम है कि केवल बीजेपी को ही देश की परवाह है।

Amit Shah


शिवसेना ने राज्यसभा में नागरिकता संशोधन बिल में कुछ बदलाव के सुझाव दिए हैं। उद्धव ठाकरे का कहना है कि, राज्यसभा में इन सुझावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि, यह शरणार्थी कहां रहेंगे? किस राज्य में रहेंगे? घुसपैठियों को बाहर करने में शिवसेना की प्रमुख भूमिका रही है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का कहना है कि, शिवसेना किसी को अच्छा या बुरा लगने के लिए कुछ नहीं करती। शिवसेना के लिए देश ही सबसे आगे है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा है कि, विधेयक पर चर्चा ज़रूरी है।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार को इस विधेयक को लागू करने से ज़्यादा अर्थव्यवस्था, नौकरी का संकट, और बढ़ती महंगाई की चिंता करने की ज़रूरत है। ठाकरे का कहना था कि, हमें इस धारणा को बदलना होगा कि इस विधेयक पर भाजपा का समर्थन करने वाले देशभक्त हैं, और जो इसका विरोध कर रहे हैं वह राष्ट्र-द्रोही हैं। विधेयक को लेकर उठाए गए सभी मुद्दों पर सरकार को जवाब देना चाहिए। लोकसभा में पारित हो चुके नागरिकता संशोधन बिल के अनुसार 31 दिसंबर 2014 तक अफगानिस्तान, बांग्लादेश, और पाकिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण आए ग़ैर मुस्लिम शरणार्थी जैसे-हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी, और ईसाई समुदायों के लोगों को भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने का पात्र बनाने का प्रावधान है।

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