नई दिल्ली: देश भर की कई यूनिवर्सिटी में छात्र नागरिकता संशोधन विधेयक (CAA) का विरोध कर रहे हैं. इसको लेकर जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी और अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में इस तरह के प्रो’टेस्ट को रोकने के लिए पुलिस ने ब’ल का प्रयोग किया जिसकी निं’दा हो रही है. एक तरफ़ जहाँ देश की राजधानी में भी छात्र इस विधेयक के ख़ि’लाफ़ प्रद’र्शन कर रहे हैं वहीँ नार्थ-ईस्ट में भी हालत इसी तरह की है. बताया जा रहा है कि सबसे बड़े स्तर पर प्रोटेस्ट असम में हो रहा है.

अपने राज्य के माहौल को समझते हुए असम गण परिषद जोकि अब तक इस विधेयक के समर्थ’न में थी, इस विधेयक के वि’रोध में ख’ड़ी हो गई है. भाजपा की सहयोगी असम गण परिषद ने माना है कि उससे ग़लती हो गई है. असम गण परिषद के अध्यक्ष प्रफुल्ला महनता ने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक को समर्थन करना हमारी भूल है. उन्होंने ये भी कहा कि वो असम में भाजपा से समर्थन वापिस ले सकते हैं.

उन्होंने कहा कि ये विधेयक असम के ख़िलाफ़ है और हम इसके ख़िला’फ़ सुप्रीम कोर्ट में जाएँगे. उन्होंने साथ ही कहा कि वो उन सभी पेटीशन का समर्थन करेंगे जो CAA के ख़िलाफ़ दायर की गई हैं. महनता ने कहा कि सरकार को मौजूदा समस्या का समाधान करना होगा..सरकार असम के लोगों की आवाज़ को दबा नहीं सकती और इन्टरनेट बं’द करना कोई हल नहीं है. महनता ने साथ ही कहा कि भारत एक सेक्युलर देश है.. कोई भी क़ानून और संविधान से बड़ा नहीं है.. जब संविधान आया था तब कहा गया था कि भारत एक सेक्युलर देश है.

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