तेल अवीव: इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू ने ख़ुद को भ्रष्टा’चार की जाँच से बचाने के लिए हर तरह के पैंतरे का इस्तेमाल किया. वो अपने धुर-विरोधी बैनी गैन्त्ज़ की ब्लू एंड वाइट पार्टी को सरकार बनाने के लिए समर्थन देने को भी तैयार थे पर शर्त ये थी कि उन पर भ्रष्टाचा’र के मामले में जाँच न हो. परन्तु अब इज़राइल के न्याय मंत्रालय ने प्रधानमंत्री के ऊपर लगे भ्रष्टा’चार के मामलों में जाँच का आदेश दिया है.

ये लिकुद पार्टी के दक्षिणपंथी नेता के लिए बड़ा झटका है. असल में इज़राइल साल में दो चुनाव देख चुका है और ऐसा माना जा रहा है कि मार्च में देश में फिर से आम चुनाव होंगे. इसकी वजह है कि दोनों चुनाव में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला और सरकार बनाने में कोई भी दल या गठबंधन कामयाब नहीं हुआ. ब्लू एंड वाइट पार्टी को भी देश के राष्ट्रपति ने मौक़ा दिया लेकिन वो भी सरकार बनाने में नाकामयाब रहे.

नेतान्याहू और बैनी गैन्त्ज़ के बीच सरकार बनाने को लेकर बात भी हुई और कहा गया कि एक ब्रोड यूनिटी सरकार की स्थापना हो सकती है. परन्तु लिकुद पार्टी की पहली माँग यही रही कि नेतान्याहू पर भ्र’ष्टाचार के मामलों में जाँच न हो. जब उनको ऐसा लगा कि ब्लू एंड वाइट इस पर राज़ी नहीं होगी तो उन्होंने देश की अरब पार्टियों के बारे में आपत्तिजनक बातें भी कहीं जिसके बाद राष्ट्रपति ने नेतान्याहू की आलोचना की.

असल में लिकुद पार्टी एक दक्षिणपंथी पार्टी है और उसने अपने चुनावी एजेंडा में धार्मिक राष्ट्रवाद को बढ़-चढ़ कर शामिल किया. कुछ जानकार तो यहाँ तक कहते हैं कि जब नेतान्याहू ने देखा कि वो फँस रहे हैं तो उन्होंने फ़िलिस्तीन के मि’लिटेंट ग्रुप ‘इस्लामिक जिहा’द’ पर ह’मला कर दिया. उन्होंने देश की यहूदी जनता को ये मैसेज देने की कोशिश की कि वो ही सबसे ताक़तवर नेता हैं और अरब पार्टियों से अगर कोई भी समर्थन लिया जाता है तो वो देशहित में नहीं होगा. बैनी गैन्त्ज़ ने ऐसी भी कोशिश की थी कि अरब पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बना लें, ऐसा होने पर नेतान्याहू पर भ्रष्टा’चार जाँच होती.

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