कुछ ऐसे जुमले होते हैं जिसको इतिहास हमेशा उसको जिंदा रखता है वर्षों गुजरने के बाद भी वो जुमले बोले जाते हैं जैसे गीदड़ की 100 साला जिंदगी से बेहतर शेर की 1 दिन की जिंदगी है उस वक्त टीपू सुल्तान का बेइख्त्यारी मुंह से निकला एक जुमला था जो इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया अंग्रेजो के खिलाफ आखिरी वक्त तक लड़ने वाले टीपू सुल्तान का ये जुमला आज भी बोला जाता है सिर्फ बोला ही नहीं बल्कि इस जुमले से लोगों को हौसला मिलता है ऐसा ही एक जुमला स्पेन के आखिरी मुसलमान बादशाह की मां का भी था जो आज भी वहां बोला जाता है ।

1492 ईस्वी में स्पेन के आखरी बादशाह अबू अब्दुल्लाह ने बगैर लड़े ही गरनाता शहर रानी एज़बीला और बादशाह फर्नांडो के हवाले करके गारनाता छोड़ दिया और चाभी दुश्मनों के हवाले कर दी उसके बाद जब वो गरनाता शहर से दूर पहुंचे और शहर आंखों से ओझल हुआ तो उसने जाते हुए कहा “आह, मेरा गरनाता, और रोने लगा तब उनकी “मां आयेशा, ने ऐसा जुमला कहा जो इतिहास में आज भी याद रखा जाता है उनकी मां ने कहा अब औरत की तरह क्यों रो रहे हो, जब मर्द की तरह दिफ़ा (लड़) नही सकते।

अबू अब्दुल्ला को स्पेन के लोग बोब दिल के नाम से याद करते हैं और मुस्लिम उनदुलुस का ज़िक्र लोग अपनाइयत से करते हैं आपको बता दें लड़ाई ना लड़ने की सूरत में आखरी मुस्लिम बादशाह को स्पनिया के शहर अलबुखारा में आम शहरी की तरह रहने की इजाजत दी गई थी ये आहें भरने वाला बादशाह अलबुखारा से मर्राकेश चला गया कहते है वहां उसका कोई स्वागत नही हुआ 1533 में उनका इंतेक़ाल हुआ और उनकी क़बर मर्राकेश के शहर फ़ैज़ में बनी ।

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