जब बाबर के सामने यु-द्ध के मैदान से भाग खड़ा हुआ राणा सांगा

September 6, 2018 by No Comments

ज़हीरुद्दीन मुहम्मद बाबर मुग़ल साम्राज्य के पहले बादशाह थे. 23 फ़रवरी, 1483 को अंदिजन (जो आज उज़्बेकिस्तान में है) में जन्मे बाबर ने 1 अप्रैल, 1526 को भारत में मुग़ल साम्राज्य की स्थापना की. 26 दिसम्बर, 1530 को बाबद की मौ-त हो गयी. वो तैमूर लंग के परपोते था, और वो अपनी किताब “बाबरनामा” में लिखते हैं कि चंगेज़ ख़ान उनके वंश के पूर्वज था. बाबर दिल्ली की सत्ता पर क़ब्ज़ा करना चाहता था लेकिन उस समय यहाँ लोदी साम्राज्य सत्ता में था और इसका शासक इब्राहिम लोदी था.

इब्राहीम लोदी और बाबर के बीच पानीपत का यु’द्ध हुआ जिसे पानीपत की पहली लड़ाई के रूप में भी जाना जाता है. इस यु-द्ध में पहली बार भारतीय उपमहाद्वीप में बारूदी हथियारों का इस्तेमाल हुआ. बाबरनामा के अनुसार ये यु’द्ध 21 अप्रैल, 1526 को लड़ा गया था और बाबर की सेना लोदी की सेना के मुक़ाबले बहुत छोटी थी. बाबर ने लेकिन सैन्य कुशलता का ज़बरदस्त परिचय दिया और इब्राहिम लोगी को हरा दिया. इब्राहीम लोदी दिल्ली सल्तनत का अंतिम बादशाह था.

बाबर


कहा जाता है कि इस यु-द्ध में राजपूत सेना का जीतना निश्चित लग रहा था लेकिन तैमूरों ने राणा सांगा का साथ बीच में छोड़ दिया और बाबर के साथ हो गए. राणा सांगा को यु-द्ध से भागना पड़ा. जो जीत बहुत आसान सी लग रही थी उसमें राणा सांगा को यु-द्ध के मैदान से भाग जाना पड़ा. 30 जनवरी, 1528 को राणा सांगा की मौ-त हो गयी, सांगा को उसके मंत्री ने ज़हर खिला दिया था. राणा सांगा की मौ-त के साथ ही बाबर की गद्दी को चुनौती देने वाला भी चला गया.

बाबर के स्थापित किये मुग़ल साम्राज्य ने भारत पर लगभग 317 साल राज किया. हालाँकि मुग़ल विदेशी थे लेकिन वो जल्दी ही इस मिटटी में घुल गए. उन्होंने भारत को हमेशा अपना देश समझा और यहाँ की संस्कृति के साथ मुग़ल संस्कृति को मिक्स किया.26 दिसम्बर 1530 को महज़ 47 वर्ष की आयु में बाबर की मौ-त हो गयी. उसके बाद उसके बेटे हुमायूँ ने सत्ता संभाली.

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *