नई दिल्ली: हैदराबाद क्रिकेट संघ की शीर्ष परिषद ने अपने संविधान के कथित उ’ल्लंघन के लिए अध्यक्ष और पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन को उनके पद से ह’टा दिया। अजहरुद्दीन के खिलाफ दु’र्व्यवहार के आरोप लगाए गए साथ ही हितों के टकराव के भी आरोप लगाए गए हैं। शीर्ष परिषद को अध्यक्ष को निलंबित करने का अधिकार नही है। क्योंकि यह अधिकार केवल राज्य इकाई की आम सभा का है। इसलिए अजहरुद्दीन के उनके पद से निलंबन पर वैधता को लेकर सवाल खड़े किए जा सकते हैं। एचसीए की शीर्ष परिषद की अजहरुद्दीन से पहले ही वि’रोध की स्थिति चल रही थी। बीसीसीआई की आम सभा की बैठक के दौरान टकराव की स्थिति और बढ़ गई।

एचसीए ने कहा, “सदस्यों द्वारा आपके (अजहरुद्दीन के) खिलाफ की गई शिकायतों को देखते हुए इस महीने की 10 तारीख को शीर्ष परिषद की बैठक में यह फैसला किया गया है इस आधार पर आपको कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए कि आपने नियमों का उल्लंघन किया है।’ इसमें कहा गया, ‘शीर्ष परिषद आपको निलंबित कर रही है और एचसीए की आपकी सदस्यता इन शिकायतों की जांच होने तक रद्द की जाती है”।

शीर्ष परिषद ने अजहरुद्दीन पर आ’रोप लगाते हुए नो’टिस में कहा कि उन्होंने कभी यह खु’लासा नही किया कि वो टी 10 टीम के मालिक है। यह बीसीसीआई संविधान का उल्लंघन हैं क्योंकि क्रिकेट इकाई के स्वामित्व की स्वीकृति किसी भी पदाधिकारी को नही है। अजहरुद्दीन ने प्रेस रिलीज़ में कहा, गलत जानकारी मीडिया में प्रकाशित की गई इसलिए क्रिकेट प्रशासन आज ख’तरे में आ गया। सूचनाओं की जांच पड़ताल करें, क्योंकि जो भी लिखा जाता है उसपर समाज विश्वास करता है।

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