मोदी सरकार के दो मंत्रा’लय आपस में भि’ड़े, इस व’जह से हुई…

भारत राजनीति

यूँ तो देश के सामने कई सम’स्याएँ मुँ’ह बा’ये ख’ड़ी हैं लेकिन उनमें अगर किसी को सबसे महत्व’पूर्ण माना जाए तो वो है बच्चों में कुपो’षण की समस्या। इसके कारण हर साल कई बच्चे अपनी ज़िं’दगी से हाथ धो बै’ठते हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने इस मामले में बड़ा क़द’म अपनाते हुए अपने पो’षण कार्यक्रम के लिए 15वें वित्त आयोग से अधिक सहा’यता की माँ’ग की। महिला एवं बाल विकास मंत्रा’लय का कहना है कि उन्हें इस लक्ष्य को पाने के लिए अधिक मद’द की आवश्यकता होगी।

आयोग ने कहा कि बच्चों को कुपो’षण से ब’चाने के लिए शुरू किए गए पोष’ण कार्यक्रम को 2020-21 के वित्तीय वर्ष में 7735 करोड़ रुपए के अनु’दान की सिफ़ा’रिश की लेकिन इस माम’ले में वित्त मंत्रालय का नज़’रिया बदला हुआ है। जहाँ आयोग ने कहा कि ये एक ऐसा मु’द्दा है जिस पर किसी भी प्रकार की देरी मानव पूँजी पर अ’सर डा’ल सकती हैं। वहीं वित्त मंत्रालय का कहना है कि इस माम’ले में पहले ही सर’कार की ओर से काफ़ी धनरा’शि दी गयी है।

Narendra Modi

वित्त मंत्रालय ने कहा कि सर’कार इस पोष’ण के लिए बहु-क्षे’त्रीय अभि’यान चलाती आयी है और 2017-18 में तीन वर्षों के लिए 9046 करोड़ रुपए के अनुदा’न की बात कही जा चुकी है। वित्त मंत्रालय के एक अधि’कारी ने कहा कि “आयोग ने कुछ प्रद’र्शन विशे’षताओं के साथ पोष’ण के लिए एक क्षे’त्रीय अनु’दान की सिफ़ा’रिश की है। हमने पोष’ण के लिए इस क्षेत्रीय अनुदान को स्वी’कार नहीं किया है क्योंकि हमारे पास पहले से ही पोष’ण यो’जना है। हम उसे फ़ं’ड कर रहे हैं और हमें लगता है कि इसमें उस पोष’ण योजना से कुछ भी नया नहीं है ये उसका डुप्ली’केट है।”

NIrmla Sitaraman

पोष’ण मिश’न, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अंत’र्गत एक बहु मंत्रा’लय पहल है जिसमें 6 साल तक के बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और स्त’नपान करने वाली महिलाओं के साथ ही बच्चों के पोष’ण में बेह’तरी के लिए शुरू किया गया था। लेकिन अब इस मामले में जहाँ सभी मोदी सर’कार के दो मंत्रा’लय सह’मति नहीं बिठा पा रहे हैं। जबकि ये एक ऐसा माम’ला है जिसमें ढी’ल आने वाली नस्लों के लिए परे’शानी का सौ’दा हो सकती है।

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